अयोध्या : आकार लेगा भव्य राम मन्दिर, लेकिन मस्जिद की जमीन को लेकर फिर खड़ा हुआ विवाद

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द लोकतंत्र / सुदीप्त मणि त्रिपाठी : दशकों पुराने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ बीते 9 नवंबर 2019 को सुबह 10.30 बजे अपना निर्णय सुनाया था।  सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में फैसला दिया था और तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने की मियाद तय की थी। शीर्ष न्यायालय के निर्देश की तामील करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ऐलान किया। साथ ही विवादित स्थल के अंदर और बाहर के क्षेत्र का कब्जा ट्रस्ट को दे दी गयी। केंद्र सरकार के गजट के मुताबिक ट्रस्ट का नाम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र रखा गया है। ट्रस्ट को परासरण के आवास आर 20, ग्रेटर कैलाश, पार्ट-1, नई दिल्ली से चलाया जाएगा। केन्द्र सरकार द्वारा घोषित ‘श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र’ नामक ट्रस्ट पूरी तरह स्वायत्त और स्वतंत्र है। देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल और अदालत में राम मंदिर और हिंदू धर्म के विशेष पैरोकार रहे के. परासरन को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है। कुल 9 सदस्य स्थायी और 6 सदस्य नामित किये गये। केंद्र सरकार के गजट के मुताबिक ट्रस्ट, संपत्ति और फंड दोनों का संचालन करेगा। ट्रस्ट समयानुसार नियमों में बदलाव भी कर सकेगा। ट्रस्ट एक स्वतंत्र निकाय होगा। 

रामनवमी या अक्षय तृतीया को रखी जाएगी राममन्दिर की नींव

राम मंदिर का निर्माण 2 अप्रैल (रामनवमी के दिन) या फिर 26 अप्रैल (अक्षय तृतीया) के दिन शुरू किया जाएगा। इस मामले में अंतिम फैसला ट्रस्ट की पहली बैठक में लिया जाएगा। रामनवमी श्री राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक में श्री राम के रूप में अवतार लिया था। वहीं अक्षय तृतीया भी काफी महत्वपूर्ण तिथि है और इस दिन किये गये कार्य शुभ फलदायी होता है और कई जन्मों तक उसका लाभ मिलता है।

मस्जिद के लिए दी गई जमीन से असंतुष्ट बाबरी एक्शन कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समाज को 5 एकड़ जमीन देने की जो बात कही थी उस पर भी मुहर लग गई है। लेकिन यूपी सरकार द्वारा जो जगह मस्जिद के लिए चिन्हित की गई है उससे आम मुसलमानों एवं अयोध्या के मुसलमानों मे नाराजगी देखने को मिल रही और मुस्लिम समुदाय इस जगह से नाखुश हैं। योगी सरकार मस्जिद के लिए पांच एकड़ ज़मीन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देने जा रही है। लेकिन अयोध्या के तमाम मुसलमान और इस विवाद में पक्षकार लोगों द्वारा इतनी दूर ज़मीन देने के प्रस्ताव का भी विरोध कर रहे हैं। आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक मस्जिद निर्माण के लिए भूमि उपयुक्त जगह पर नहीं दी गई है। वहां अयोध्या के लोग नमाज पढ़ने नहीं जा सकते। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अब राज्य सरकार के आवंटन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। राज्य सरकार ने बुधवार को मस्जिद के लिए पांच एकड़ भूमि का आवंटन किया। यह भूमि लखनऊ हाईवे पर स्थित रौनाही थाना के ठीक पीछे धन्नीपुर गांव की है। हालांकि जिला प्रशासन ने भूमि आवंटन के लिए तीन स्थानों का ब्यौरा भेजा था। इसमें सबसे ज्यादा दूर यही जगह थी जिसे मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन के अधिकारियों के साथ बातचीत में पहले ही अनुपयुक्त बताया था।

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