मप्र : सामने आया 540 करोड़ का स्वच्छ शौचालय घोटाला, मिले ही नहीं 4.5 लाख शौचालय

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द लोकतंत्र / सुदीप्त मणि त्रिपाठी : मध्यप्रदेश में 540 करोड़ रुपये का स्वच्छ शौचालय घोटाला सामने आया है। अधिकारियों का मानना है कि ये 4.5 लाख शौचालय वास्तव में बने ही नहीं थे। सबूत के रूप में जिन शौचालयों की फोटो जमा की गई वह कहीं और के शौचालयों की थी। शिवराज सरकार ने तय 90 लाख लक्ष्य के सापेक्ष 36 लाख शौचालय बनाने का सरकारी दावा किया था। बता दें कि सरकारी आंकड़ो के मुताबिक मध्य प्रदेश के 90 लाख घरों में शौचालय नहीं थे।

महात्मा गाँधी की 150वीं वर्षगांठ के अंतर्गत 2019 तक भारत को खुले में शौच से मुक्त करना इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य रखा गया था और इसके लिए करोड़ों शौचालयो का निर्माण किया जाना था लेकिन मध्यप्रदेश से जिस तरह की खबर आ रही है उससे यह जाहिर है कि पूरे देश में शौचालयों के निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितता हुयी है। स्वच्छ भारत अभियान मोदी सरकार की महत्वकांक्षी योजना है और इस योजना के अंतर्गत भष्टाचार गंभीर सवाल खड़े करता है।

योजनाओं के समय से पूरा न होने पर चौतरफा चपत अलग से :

दरअसल, देश के राज्यों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए वर्ल्ड बैंक की ओर कर्ज दिया जाना था, लेकिन इसके लिए विभिन्न चरणों में वास्तविक परिणामों की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सौंपने की शर्त थी। स्वतंत्र जांच सर्वेक्षण न हो पाने के कारण जुलाई 2017 में तक करोडों डॉलर का फंड नहीं मिल पाया। हालत यह है कि विश्र्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मंजूर हुए ऋण को समय पर न उठाने के चलते देश के खजाने को भी अरबों रुपये की चपत लग रही है। यह बात कैग द्वारा ऑडिट करने पर सामने आई कि बीते पांच साल में कमिटमेंट चार्ज का आंकड़ा 553 करोड़ रुपये से अधिक है ।

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