दिल्ली के ‘बेटे’ ने जीता सियासी रण, केजरीवाल की रणनीति नें भाजपा को दी पटखनी

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Arvind Kejriwal

द लोकतंत्र : दिल्ली के बेटे अरविंद केजरीवाल नें सियासी रण जीत लिया है और आम आदमी पार्टी लगातार तीसरी बार दिल्ली में सरकार बनाने की तरफ बढ़ रही है। अरविंद केजरीवाल की रणनीति ने आम आदमी पार्टी को फिर दिल्ली की सत्ता तक पहुंचा दिया है। वहीँ, शाह की रणनीति, भाजपा के कार्यकर्ताओं की विशाल सेना का मैराथन जनसंपर्क, बड़ी बड़ी रैलियों और बूथ बूथ पन्ना प्रमुख की नियुक्ति भी भाजपा को 45 पार नहीं पहुंचा सकी।

अरविंद केजरीवाल के लिए यह चुनाव करो या मरो की स्थिति वाली थी और उन्होंने अपने बेहतर संयोजन से दिल्ली में जबरदस्त जीत हासिल कर ली। प्रचार के दौरान खुद को दिल्ली का बेटा कहने वाले केजरीवाल वाकई दिल्ली का बेटा साबित हुए। 

आखिर कहाँ चूकी भाजपा :

अरविंद केजरीवाल जहाँ शुरू से अपने काम की बदौलत लड़ रहे थे और बाकी मुद्दों को उन्होंने खास तवज्जो नहीं दी वहीं भारतीय जनता पार्टी हिन्दू-मुस्लिम पोलराईजेशन की जुगत में थी और शाहीन बाग़ के मुद्दे को भरपूर उछाल रही थी। यहाँ तक की आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा में आये और मॉडल टाउन से बीजेपी प्रत्याशी कपिल मिश्रा ने तो इस चुनाव को भारत बनाम पाकिस्तान करार दे दिया था। नतीजों से साफ़ है कि दिल्ली नें भाजपा के जबरदस्ती के पैदा किये मुद्दों को ख़ारिज किया और केजरीवाल के काम पर अपना समर्थन दिया।

शाह की किरकिरी या नड्डा हुए हार के जिम्मेदार

दिल्ली चुनाव के आखिरी समय में शाह नें भाजपा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी जेपी नड्डा को सौंप दी थी और नड्डा का खाता दिल्ली में हार के साथ खुला। नड्डा इस हार के दाग के साथ कैसे संगठन को चला पायेंगे और बतौर भाजपा अध्यक्ष उनका आगे का सफर कितना कठिन होगा यह तो आने वाला वक्त तय करेगा। लेकिन, दिल्ली हार के छींटे राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह के दामन पर भी पड़े हैं क्योंकि अरविंद केजरीवाल एक मुश्किल चुनौती के रूप में भाजपा के सामने थे जिसकी वजह से अमित शाह खुद गली गली पर्चे बांटने पर मजबूर हो गये थे।