कन्हैया का स्थापित होना कैसे नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए चुनौती? उनपर हो रहे हमलों का जिम्मेदार कौन?

0
kanhaiya-kumar

द लोकतंत्र / सुदीप्त मणि त्रिपाठी : अभी हाल ही में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें जेएनयू के पूर्व छात्र नेता और लोकसभा चुनाव 2019 में बेगूसराय से लेफ्ट के उम्मीदवार रह चुके कन्हैया कुमार को मोदी सरकार अपने लिए सबसे बड़ा ख़तरा मान रही है। यह रिपोर्ट इसलिए भी चौकाती हैं क्योंकि इसमें दावा किया गया कि यह ख़बर प्रधानमंत्री के सहयोगी के हवाले से लिखी गयी है। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र था कि पीएमओ कन्हैया कुमार की हर गतिविधि यहाँ तक की उनके बैंक खातों और खर्चों पर भी बारीक़ नज़र बनाये हुए है।

कन्हैया कैसे बन गये मोदी सरकार के लिए सरदर्द?

दरअसल, कन्हैया कुमार की रैलियों में इन दिनों भारी भीड़ जुट रही है। कन्हैया अपनी रैलियों में मोदी सरकार पर जमकर हमला बोल रहे हैं। रोजगार से लेकर अर्थव्यवस्था तक के मुद्दों पर कन्हैया के निशाने पर मोदी सरकार बनी हुयी है। कन्हैया कुमार बिहार में एक यात्रा कर रहे हैं। यह यात्रा संसद में पास हो चुके नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA), नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) और नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन (NRC) के विरोध में हो रही है। कन्हैया द्वारा शुरू की गयी जन-गण-मन यात्रा बिहार में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ लोगों को एकजुट करने के लिए की जा रही है। इस साल बिहार में चुनाव भी है और केंद्र सरकार को डर है कहीं बाकी राज्यों की तरह बिहार में भी खेल पलट न जाए इसलिए कन्हैया कुमार को प्रधानमन्त्री खुद काफी सीरियसली ले रहे हैं।

कन्हैया पर बढ़ रहे हमले, जिम्मेदार कौन?

पिछले दो सप्ताह में कन्हैया कुमार के काफिले पर छह से ज्यादा हमले हो चुके है। जन गण मन यात्रा के दौरान कन्हैया के काफिले पर सातवाँ हमला हुआ ऐसा आयोजकों का दावा है। जिन ज़िलों से कन्हैया कुमार की यात्रा गुजरी है, हर जगह कन्हैया कुमार पर हमले हुए हैं। कन्हैया कुमार की यात्रा बिहार के सभी जिलों से होकर गुजरनी है और कल कन्हैया कुमार बक्सर के किला मैदान में आयोजित सभा को सम्बोधित करेंगे।

पत्रकारिता को राजनीति और कारपोरेट दबावों से पूरी तरह मुक्त रखने के लिए कृपया द लोकतंत्र की आर्थिक मदद करें। किसी भी तरह के स्वैच्छिक राशि को डोनेट करने हेतु बटन पर क्लिक करें –