क्या सरकारों से अब ‘सत्याग्रह’ भी बर्दाश्त नहीं? यह मान लें कि ‘दौर-ए-गुलामी’ लौट आया..

0

द लोकतंत्र / सुदीप्त मणि त्रिपाठी : सत्ता में बैठे चंद लोगों को क्या अब नागरिकों का ‘सत्याग्रह’ भी मंज़ूर नहीं? इस देश मे हालात यह बन गए हैं कि अब आप अपने हक़ ले लिए आवाज़ तक नहीं उठा सकते। यह दौर कुछ कुछ वैसा ही है जैसे 1947 के पूर्व अंग्रेजी शासन के दौरान देश मे हुआ करती थी। सवाल बहुत गंभीर है हम सबके लिए कि आखिर सत्ता का चरित्र इतना क्रूर कैसे हो सकता है? यह जो रवायत चल निकली है और इससे जो आग लगेगी उसकी तपिस पीढ़ियों तक महसूस की जाएगी। गाँधी के साथ साथ उनके विचारों की हत्या का श्रेय भी हिंदुत्व के एजेण्डे पर आगे बढ़ रही आरएसएस और भाजपा के सर बंध रही है।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में चौरीचौरा से राजघाट तक पदयात्रा कर रहे 10 छात्रों जिनमें एक पत्रकार भी शामिल हैं, को गिरफ़्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में BHU के 7 छात्रों के अतिरिक्त कुछ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। यह सभी लोग गोरखपुर और देवरिया जिले के मध्य स्थित चौरी चौरा जिसका अपना ऐतिहासिक सन्दर्भ भी है से दिल्ली राजघाट के लिए पदयात्रा पर निकले थे। इस यात्रा नें करीब 9 दिन में तीन जिलों क्रमशः गोरखपुर, आज़मगढ़ और मऊ को पार करके गाज़ीपुर में पहुंचे थे जहां पुलिस नें धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में इन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गाज़ीपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत

गाज़ीपुर के पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह के हवाले से बीबीसी नें लिखा है कि, “पूरे जिले में धारा 144 लगी हुई है। मुख्य रूप से इन्हें धारा 144 के उल्लंघन में ही गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को इनके पास से कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिससे माहौल खराब होने की आशंका थी।”

जमानत के संदर्भ में गाज़ीपुर के एसडीएम नें कहा है कि जमानत के लिए प्रत्येक को ढाई ढाई लाख के दो बांड भरने होंगे और साथ ही दो राजपत्रित अधिकारियों की गारण्टी भी देनी होगी।

पदयात्रा के दौरान पत्रकार प्रदीपिका लिखती हैं, ” अजनबी गाँवों-क़स्बों से गुज़रते हुए लोग रोक कर बैठा लेते हैं। पूछते हैं बचवा इतना दूर कइसे जाओगी पइदल। मंदिर पर बाबा गुड़ और लाई खिला देते हैं। आगे ये अम्माँ बिठा कर चाय बनवा देती हैं। मुल्क में प्यार मोहब्बत बहुत बाक़ी है। “

सवाल बहुत गम्भीर है और समस्या काफी विकट। आखिर सरकार को इस पद सत्याग्रह से कैसी आपत्ति? धारा 144 के उल्लंघन के नाम पर इन पद सत्याग्रहियों की गिरफ्तारी कितनी वाज़िब? क्या आज़ाद देश में अब आम नागरिकों को इतनी भी आज़ादी नहीं है कि वो अपने अधिकारों के लिए शांति मार्च तक कर सकें? जवाब कौन देगा क्योंकि सवाल तो हम पूछेंगे। क्या देश में नरेंद्र मोदी सरकार और सूबे की योगी सरकार की पॉलिसी में नागरिकों को अपने हक़ की आवाज उठाने पर आपत्ति है?

Like
Like Love Haha Wow Sad Angry