पुलवामा शहीदों को याद करने के बहाने मोदी सरकार की ‘नीयत’ भी जान लीजिये

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द लोकतंत्र / सुदीप्त मणि त्रिपाठी : “तुम्हारे शौर्य के गीत, कर्कश शोर में खोये नहीं। गर्व इतना था कि हम देर तक रोये नहीं।” तीन दिन पूर्व इन्ही पंक्तियों के साथ सीआरपीएफ ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से पुलवामा के शहीदों को शत-शत नमन किया। और तीन दिन पूर्व ही देश नें वो तस्वीर भी देखी जिसमें इन शहीद के परिवारों को गंभीर आर्थिक तंगी से जूझते हुए सड़क किनारे सब्जी बेचने पर मजबूर होना पड़ा।

दरअसल, पुलवामा आतंकी हमले के एक साल बीतने के बाद भी इन शहीदों के परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं था। बताते चलें इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। यह जवान सीआरपीएफ की 76 बटालियन से थे। उन 40 शहीदों में एक नाम विजय सोरेंग का भी था। शहीद विजय सोरेंग झारखंड के गुमला जिले के मायाटोली गांव के रहने वाले थे। जहां अब उनकी पत्‍नी विमला देवी अपने चार बच्‍चों के साथ रहती है। विमला देवी की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि वे सड़क पर सब्जियां बेच रही हैं। हालांकि हमले के बाद सरकार द्वारा शहीदों के परिवारों के लिए कई तरह के वादे किए गए थे।

शहीदों के लिए एकजुट हुआ था देश, लोगों ने दान किए थे 46 करोड़

उस वक्त बेइन्तहा दुख की घड़ी में देश का हर नागरिक शहीदों के परिवार के साथ मजबूती से खड़ा था। एक मीडिया वेबसाइट के मुताबिक भारत के नागरिकों और कई नामचीन हस्तियों ने मिलकर शहीदों के लिए 45 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दान की थी। शहीदों के परिजनों की मदद के लिए बनाए गए भारत सरकार के वेब पोर्टल ‘भारत के वीर’ पर यह राशि दान की गई थी। भारत सरकार ने इस राशि से हर एक शहीद परिवार को 15-15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी।

सवाल यही से उठता है कि जब शहीदों के परिवारों को 15-15 लाख की राशि दी जानी थी तो आखिर क्यों विमला देवी को सब्जी बेचने पर मज़बूर होना पड़ा ?

इस सन्दर्भ में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाल नें लगातार ट्वीट कर मोदी सरकार की ‘नीयत’ पर गंभीर सवाल उठाये थे :


चूँकि ट्वीट कांग्रेस की तरफ से की गयी थी इसलिए आपने इसपर बहस करना भी जरूरी नहीं समझा लेकिन ट्विट में पूछे गये सवाल बहुत बड़े और गंभीर थे जिसे Ignore करके भी नहीं रहा जा सकता।

राष्ट्रवादी सरकार की ‘नीयत’ पर यह जो गहरे प्रश्नचिन्ह हैं उसे कैसे जस्टिफाई करेंगे आप? अगर सबकुछ साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है फिर यह गहरी चुप्पी किसलिए? यानी हम सभी यह मान लें कि देश में अगले कई दशकों तक परिवर्तन की उम्मीद भी बेमानी है क्योंकि हमें फर्क नहीं पड़ता।

हालाँकि देर से ही सही विमला देवी के सन्दर्भ में झारखण्ड के सीएम हेमंत सोरेन नें संज्ञान में लेते हुए त्वरित सहायता की पहल की और ट्वीट कर सम्बंधित जिला प्रशासन को निर्देशित किया। लेकिन विमला देवी के एक साल के आंसुओ का हिसाब कौन देगा? क्या देश के लिए अपनी जान की परवाह तक न करने वाले वीर जवानों को हम ऐसे ही इज्जत बख्शते रहेंगे?

यह जरूर सोचियेगा कि जिस ‘राष्ट्रवाद’ की परिभाषा में आप लोग जी रहे हैं क्या वह वाकई ‘राष्ट्र’ से कोई सरोकार रखता है या यह सबकुछ ऐसे ही फर्जी ‘विज्ञापन मैटेरियल’ है जिसका उद्देश्य आपकी भावनाओं से महज खेलना है ।

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