कांग्रेस को नए नेतृत्व की जरूरत लेकिन बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे

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द लोकतंत्र / सुदीप्त मणि त्रिपाठी : पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस पार्टी के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस बहुत मुश्किल में है और अगर राहुल गांधी इसकी कमान संभालने को तैयार नहीं होते तो आम सहमति से नया अध्यक्ष चुना जाए। पार्टी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि इसे लेकर बातें और चर्चाएं बहुत हो चुकी हैं और अब कार्रवाई का समय है।

आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी के लगातार गिरते ग्राफ से पार्टी के वरिष्ठ नेता चिंतित हैं और शीघ्र ही नेतृत्व में मूलभूत बदलाव चाहते हैं लेकिन खुल कर पहल कोई नहीं कर रहा। दिल्ली चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी कुछ खास नहीं कर पायी और एक बार फिर शून्य पर निपट गयी। वहीं दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी को 62 तो भाजपा को 8 सीटों पर जीत मिली। दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का वोट शेयर भी घटकर 5 फीसद से नीचे आ गया।

इससे पहले कांग्रेस पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी यही बात दोहराई थी । थरूर का कहना था कि कांग्रेस की छवि इस समय बिन पतवार की नाव जैसी है जिससे इसे काफी नुकसान हो रहा है। शशि थरूर के मुताबिक इस छवि के चलते कांग्रेस का वोट बैंक उससे छिटककर दूसरी पार्टियों के पास जा रहा है।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में आलम यह रहा कि पार्टी के 66 उम्मीदवारों में से 63 की जमानत तक जब्त हो गई। इन सीटों पर कांग्रेस को कुल वोटों के पांच फीसदी से भी कम वोट मिले। नेतृत्व के अभाव में यह लग रहा था कि कांग्रेस खुद ही ख़ुदकुशी करने दिल्ली की सियासी रण में उतरी है। खैर, कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि नेतृत्व में बदलाव हो और दबी जुबान में आपस में चर्चा भी कर रहे हैं लेकिन आखिर में सवाल वहीं अटक जाता है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे ?

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