दंगो पर केजरीवाल की चुप्पी और कन्हैया पर केस चलाने की मंज़ूरी दोनों ‘संदिग्ध’

0
cm_kejriwal

द लोकतंत्र / दिल्ली डेस्क/ नीतिश कुमार : यह तो मानी हुयी बात है कि सियासत में कुछ भी निश्चित नहीं होता। कुछ सियासी मजबूरियां और कुछ वोट बैंक मैनेज करने का लालच ही अक्सर राजनीतिक दलों की सियासी बिसात तय करती है। दिल्ली हिंसा में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का स्टैंड एक मूकदर्शक से ज्यादा कुछ नहीं रहा जो काफी हैरान करती हैं। यह अपने आप में संदिग्ध है कि दंगो के दौरान अरविंद केजरीवाल का रवैया बेहद ही गैरजिम्मेदाराना और मज़बूरी भरा रहा जो दिल्ली द्वारा आम आदमी पार्टी को दिए गए जनादेश का मजाक है। इस कठिन समय में जिस तरह केजरीवाल अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते नज़र आये यह बात उनमें मजबूत नेतृत्व की कमी को दिखाता है। जब दिल्ली जल रही थी उस वक़्त केजरीवाल धरने की नौटंकी में व्यस्त थे जबकि बतौर मुख्यमंत्री वो सशक्त दखल दे सकते थे।

खैर, प्रचण्ड जनादेश से दुबारा मुख्यमंत्री बनने के बावजूद इस पूरे मामले में केजरीवाल द्वारा स्पष्ट तौर पर कुछ भी न कहना काफी गहरे सवाल खड़े करता है। दिल्ली सरकार की तरफ से ऐसा कोई ठोस प्रयास नहीं हुआ, जो यह साबित करे कि वह इस हिंसा के प्रति संवेदनशील है । आखिर केजरीवाल पर अब किस बात का दबाव है यह वही बता सकते हैं। कहीं दिल्ली दंगो में आम आदमी पार्टी की संलिप्तता तो इस चुप्पी की वजह नहीं रही? क्योंकि, दिल्ली दंगो में जिस तरह आप पार्षद ताहिर हुसैन का नाम सामने आया और ताहिर के बचाव में आप विधायक अमानतुल्लाह जिस तरह खड़े नज़र आ रहे कहीं इसी बात को लेकर केजरीवाल बैकफुट पर तो नहीं। यह ख़ामोशी मुस्लिम वोट बैंक को बचाए रखने की भी हो सकती है क्योंकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत के पीछे के इस फैक्टर को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब जब नीयत पर सवाल उठा है तब केजरीवाल नें अपनी छवि को बचाने के लिए आनन फानन में राजद्रोह के एक मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और दो अन्य लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस को मंजूरी दे दी। सियासत की थोड़ी भी समझ रखने वालों को इस फैसले के पीछे छिपे निहित स्वार्थ को समझने में दिक्कत नहीं होगी। लोग केजरीवाल की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछ रहे हैं कि अचानक केजरीवाल द्वारा भाजपा के साथ इस फ्रेंडली मैच की वजह क्या है? दिल्ली का आम मतदाता जिसने केजरीवाल को सिर्फ इसलिए वोट किया कि वो अन्य सियासी दलों से कुछ अलग हैं; को गहरा झटका लगा है।

दिल्ली सरकार के इस फैसले पर ट्वीट करते हुए कन्हैया नें लिखा – ‘दिल्ली सरकार को सेडिशन केस की परमिशन देने के लिए धन्यवाद। दिल्ली पुलिस और सरकारी वक़ीलों से आग्रह है कि इस केस को अब गंभीरता से लिया जाए, फॉस्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल हो और TV वाली ‘आपकी अदालत’ की जगह क़ानून की अदालत में न्याय सुनिश्चित किया जाए। सत्यमेव जयते।’

पत्रकारिता को राजनीति और कारपोरेट दबावों से पूरी तरह मुक्त रखने के लिए कृपया द लोकतंत्र की आर्थिक मदद करें। किसी भी तरह के स्वैच्छिक राशि को डोनेट करने हेतु बटन पर क्लिक करें –