देवरिया का यह युवा है ‘Unsung Hero’ जिसने मुंबई में टीम बनाकर लोगों की मदद की

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Parth Sarthi Shukla

द लोकतंत्र / उमा पाठक : देशभर में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस की कहानियों के बीच एक अच्छी कहानी देवरिया की भी है। जनपद के जिस युवा की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं वह खुद मुंबई में फंस गया था लेकिन हौसले कहाँ थमने वाले हैं अपनी परेशानियों को भूलकर यह युवा लोगों की मदद करने खुद कूद पड़ा। देवरिया के पार्थ शुक्ला वो ‘Unsung Hero’ हैं जिनका जिक्र जरूरी हो जाता है। इस बेहद मुश्किल समय में जब लोग बेहद परेशान होकर अपने परिवार से दूर, काम-धंधा बंद हो जाने से लाचार चिंतित होकर बैठे थे तो ऐसे में देवरिया के पार्थ ने एक ‘उम्मीद’ के रूप में लोगों की मदद की।

द लोकतंत्र से बातचीत के दौरान पार्थ बताते हैं कि, एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में वो मुंबई गए थे वापसी से पूर्व ही देश भर में लॉक डाउन लग गया। चूँकि, मेरा क्षेत्र सोशल वर्क है और मैंने बहुत से सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर पॉलिसी मेकिंग और इम्प्लीमेंटेशन का काम किया है इसलिए मुंबई के कुछ संस्थाओ के साथ जुड़कर मैंने लोगों की मदद करने का दायित्व उठाया। उस समय जब सबकुछ बंद था, लोगों का रोजगार ख़त्म हो गया था, घरों में लोगों के पास दो वक़्त का राशन भी नहीं था ऐसे में उनतक मदद पहुंचानी काफी जरूरी हो जाती है। सरकार द्वारा मदद पहुँचने की एक प्रक्रिया होती है और यह उतना त्वरित नहीं हो पाता है ऐसे में सामाजिक संस्थाओं के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है।

पार्थ ने बताया, मार्च में लॉकडाउन की शुरुआत हुयी थी तो मै किसी तरह बस घर वापस आना चाहता था। मुंबई काफी एक्सपेंसिव जगह है ऐसे में अनिश्चित काल तक ठहर पाना मेरे लिए मुश्किल लग रहा था। चूँकि एक सोशल प्रोजेक्ट के सिलसिले में था और लोगों की परेशानियों को देख न सका इसलिए एक इनिशिएटिव ‘खाना चाहिए डॉट कॉम’ के साथ जुड़ गया। छोटी-छोटी मदद काफी महत्वपूर्ण होती है और जब आप किसी के जीवन में उम्मीद बन जाते हैं तो यकीन मानिये बहुत अच्छा महसूस होता है। इस इनिशिएटिव से जुड़ने के बाद हमने पहले दिन करीब 1200 लोगों तक खाना पहुँचाया साथ ही मास्क और सेनेटाइजर जैसे जरूरी सामान भी वितरित किये। धीरे-धीरे लोगों के मदद के हाथ बढ़ते गए और हमने करीब 35 लाख लोगों को इस दरमियान खाना पहुँचाया।

खाने में दाल-चावल, ठेपला, पानी, फ्रूटी जैसी चीजें उपलब्धता के आधार पर शामिल रहीं। साथ ही मैंने अभिनेता सोनू सूद और क्रिकेटर हरभजन सिंह के द्वारा लोगों को घर भेजने की मुहीम में भी सहयोग किया। उन प्रवासियों को घर भेजने के क्रम में उनके खाने-पीने की व्यवस्था में ‘खाना चाहिए डॉट कॉम’ ने भी अपनी भूमिका निभाई।

साथ ही सड़कों पर प्रशासनिक व्यवस्था को बनाये रखने वाले पुलिस कर्मियों, एम्बुलेंस चालकों आदि को भी हमने जरूरत के मुताबिक मास्क, सेनेटाइजर, पानी आदि की व्यवस्था की। खाना चाहिए डॉट कॉम इनिशिएटिव की शुरुआत रूबेन मस्कारेन्हस, पथिक मुनि, नीति गोयल और शिशिर जोशी ने किया और यह सभी को-फाउंडर हैं।

देवरिया के पार्थसारथि शुक्ल ने इस मुश्किल वक़्त में खुद की परवाह न करते हुए लोगों की मदद का जरिया बने और अपनी मेहनत से कई लोगों तक खाना पहुँचाने का कार्य किया।

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