द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल बढ़ा दिया है। अब वह 30 मई 2026 तक इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल 30 सितंबर 2025 को समाप्त हो रहा था, लेकिन सरकार ने देश की सुरक्षा जरूरतों और सैन्य सुधारों को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोबारा विस्तार देने का निर्णय लिया। जनरल चौहान पिछले तीन वर्षों से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें इस दौरान रक्षा प्रबंधन और सैन्य सुधारों की दिशा में कई अहम कदमों के लिए जाना जाता है।
हायर डिफेंस मैनेजमेंट और डिफेंस डील सुधारों की चुनौती
जनरल अनिल चौहान के लिए सबसे बड़ी चुनौती हायर डिफेंस मैनेजमेंट (Higher Defence Management) को और अधिक प्रभावी बनाना है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की सुरक्षा नीतियों में तेजी से बदलते परिदृश्य को देखते हुए डिफेंस डील्स और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को सही दिशा देना बेहद जरूरी है। इसके अलावा तीनों सेनाओं थलसेना, वायुसेना और नौसेना का एकीकरण उनकी जिम्मेदारियों में सबसे अहम है। इस प्रक्रिया के लिए स्थिर और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, जिसे जनरल चौहान का अनुभव मजबूती प्रदान करता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान पर कड़ा रुख
सूत्रों के मुताबिक, जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल विस्तार से यह सुनिश्चित होगा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत का सख्त रुख जारी रहे। हाल ही में हुए इस अभियान ने भारतीय सेनाओं की रणनीतिक ताकत को दर्शाया है। माना जा रहा है कि उनकी मौजूदगी में भारत न केवल अपनी सैन्य रणनीति को मजबूत करेगा, बल्कि सीमा पार से होने वाली चुनौतियों पर भी प्रभावी नियंत्रण बनाए रखेगा।
जनरल बिपिन रावत के बाद देश के दूसरे CDS
गौरतलब है कि जनरल अनिल चौहान को 30 सितंबर 2022 को देश का दूसरा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया था। वे जनरल बिपिन रावत के बाद इस पद पर आए। उनकी नियुक्ति विशेष परिस्थितियों में हुई थी, क्योंकि उन्हें रिटायरमेंट से वापस बुलाया गया था। नियमों के अनुसार, 62 साल से कम उम्र के रिटायर्ड अधिकारी CDS पद के लिए योग्य होते हैं। इसी आधार पर सरकार ने उन्हें इस पद पर नियुक्त किया।
पहले थ्री-स्टार अफसर बने CDS
एक और खास बात यह है कि जनरल अनिल चौहान इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले थ्री-स्टार अफसर हैं। आमतौर पर CDS पद पर फोर-स्टार अफसर की नियुक्ति की जाती है, लेकिन उनके अनुभव और रणनीतिक सोच को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। तब से लेकर अब तक उन्होंने न केवल सेनाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, बल्कि संयुक्त सैन्य अभ्यास और ऑपरेशनल तैयारियों को भी नई गति दी है।

