द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित ऐतिहासिक रामाबाई अंबेडकर मैदान ने गुरुवार को BSP की सियासी ताक़त को महसूस किया। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने लाखों समर्थकों के बीच अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन कर बड़ा संदेश दिया है कि BSP कमजोर नहीं है।
यह रैली 2027 के विधानसभा चुनाव का शंखनाद भी साबित हुई। मायावती ने साफ़ कर दिया कि बसपा इस बार किसी गठबंधन के बिना, अकेले दम पर मैदान में उतरेगी। रैली में उमड़ी भीड़ और नीले झंडों की लहर ने दिखा दिया कि बहुजन समाज पार्टी फिर से अपने पुराने जनाधार को सक्रिय करने में जुट गई है।
मायावती ने प्रतीकात्मक तौर पर दिखाई 2027 की सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति
मायावती के साथ मंच पर आकाश आनंद सहित पार्टी के सात प्रमुख चेहरे मौजूद रहे, जो उनकी नई सोशल इंजीनियरिंग रणनीति का प्रतीक थे। इस रैली को बसपा की नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के साथ-साथ सवर्ण वोटरों को भी साधने की कोशिश नज़र आई।
मायावती ने अपने संबोधन में कहा कि कांशीराम जी की यह इच्छा थी कि जहां बहुजन समाज की संख्या अधिक हो, वहां बसपा अपने दम पर सरकार बनाए। यह सपना हमने 2007 में पूरा किया था, और अब 2027 में फिर वही इतिहास दोहराया जाएगा।
सपा सरकार ने हमेशा दोहरा रवैया अपनाया
बसपा सुप्रीमो ने विपक्षी पार्टियों पर तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि सपा जातिवादी राजनीति का सबसे बड़ा उदाहरण रही है। आरक्षण के मुद्दे पर सपा सरकार ने हमेशा दोहरा रवैया अपनाया और पदोन्नति में आरक्षण को लगभग समाप्त कर दिया। मायावती ने कहा कि जब अखिलेश यादव सत्ता में होते हैं, तब न उन्हें कांशीराम याद आते हैं, न पीडीए। सत्ता से बाहर होते ही उन्हें बहुजन याद आने लगते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर समाजवादी पार्टी को कांशीराम जी का इतना सम्मान था, तो सपा सरकार ने कासगंज ज़िले से उनका नाम क्यों हटाया?
कांग्रेस ने किया दलितों-पिछड़ों का शोषण
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि आज़ादी के बाद कांग्रेस ने दलितों और पिछड़ों का सबसे ज़्यादा शोषण किया। यहां तक कि कांशीराम जी के निधन पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक तक नहीं मनाया गया। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की असल मानसिकता और बहुजन समाज के प्रति उसके रवैये को दर्शाता है। वहीं, भाजपा सरकार पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने कहा कि योजनाओं की घोषणा तो बहुत होती है, लेकिन उनका लाभ गरीबों और वंचितों तक नहीं पहुंच पाता।
भाजपा सरकार का जताया आभार
मायावती ने लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थलों और पार्कों की दुर्दशा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि सपा सरकार ने इन स्थलों के रखरखाव पर एक रुपये तक खर्च नहीं किया, जबकि भाजपा सरकार ने मरम्मत का खर्च उठाकर इनका संरक्षण किया, जिसके लिए उन्होंने भाजपा का आभार भी जताया।
इस रैली में सबसे दिलचस्प क्षण तब आया जब मंच पर आकाश आनंद ने जनता को संबोधित करते हुए कहा, अबकी बार यूपी में पांचवीं बार सर्वजन हिताय और सुखाय की सरकार बसपा की ही बनेगी। यह सिर्फ़ राजनीति नहीं, बाबा साहेब अंबेडकर और कांशीराम जी के सपनों को साकार करने की प्रतिबद्धता है। आकाश आनंद के भाषण ने युवाओं में जोश भर दिया और रैली का माहौल और जोशीला बना दिया।
18 साल बाद रामाबाई मैदान में हुई यह रैली बसपा की ‘एकले चलो’ नीति की वापसी मानी जा रही है। मायावती का यह कदम स्पष्ट करता है कि आने वाले चुनाव में बसपा गठबंधन की राजनीति से दूरी बनाकर फिर से अपने ‘कोर वोट बैंक’ और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ मॉडल के बूते सत्ता में वापसी की राह तलाश रही है।

