द लोकतंत्र : करिश्मा कपूर के एक्स-हसबैंड और जाने-माने बिजनेसमैन संजय कपूर की मौत के बाद उनकी संपत्ति को लेकर परिवार में विवाद गहराता जा रहा है। जून 2025 में अचानक हुई उनकी मौत के बाद करीब 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार के सदस्य एक-दूसरे के खिलाफ अदालत पहुंच गए हैं।
संजय कपूर की बहन मंदिरा कपूर और मां रानी कपूर अपने हिस्से की मांग कर रही हैं, जबकि करिश्मा कपूर अपने बच्चों समायरा और किआन के हक के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में केस लड़ रही हैं। दोनों बच्चों ने अदालत में कहा है कि उनके पिता की कथित वसीयत नकली है और यह किसी साजिश के तहत तैयार की गई है।
परिवार का आरोप है कि संजय की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव ने संपत्ति हड़पने के लिए यह वसीयत तैयार करवाई है। वहीं, अदालत में इस मामले की सुनवाई मंगलवार, 14 अक्टूबर को हुई, जहां करिश्मा कपूर के बच्चों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पक्ष रखा।
जेठमलानी ने अदालत में कई तकनीकी और भाषाई विसंगतियों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि वसीयत में “मेरे सभी वारिसों” का जिक्र है, लेकिन उसमें संजय कपूर की मां रानी कपूर का उल्लेख नहीं है, जबकि वे हमेशा उनकी संपत्तियों में प्रावधान रखती थीं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि दस्तावेज़ में वसीयतकर्ता को स्त्रीलिंग रूप में संबोधित किया गया है, यानी ‘वह’ और ‘उसकी’ जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है। जेठमलानी ने इसे “हास्यास्पद और असंभव” बताते हुए दावा किया कि “यह दस्तावेज़ किसी और ने तैयार किया है, संजय कपूर ने नहीं।”
उन्होंने आगे कहा कि वसीयत में किसी भी तरह की प्रामाणिकता नहीं है न तो कोई हस्तलेखन मौजूद है, न सिग्नेचर की पुष्टि, न फोटो और न ही कोई डिजिटल प्रमाण। जेठमलानी ने कहा, “यह ऐसा है मानो किसी ने एक डिजिटल ‘भूत’ बना दिया हो।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दस्तावेज़ तैयार करने वाला नितिन शर्मा नाम का व्यक्ति भी जांच के घेरे में है। जेठमलानी ने बताया कि यह वसीयत संभवतः नितिन शर्मा के लैपटॉप पर तैयार की गई थी, लेकिन इस बात का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
वहीं, दूसरी ओर संजय कपूर की मां और बहन ने भी अदालत से आग्रह किया है कि उनकी हिस्सेदारी को कानूनी रूप से सुरक्षित किया जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर 2025 में निर्धारित की गई है।
फिलहाल, कपूर परिवार के भीतर इस विवाद ने बॉलीवुड सर्किल में भी हलचल मचा दी है। जहां एक ओर यह कानूनी जंग लंबी खिंचने के आसार हैं, वहीं यह सवाल अब भी बना हुआ है, आखिर संजय कपूर की असली वसीयत कहां है?

