द लोकतंत्र/ पटना : भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव अब राजनीति के अखाड़े में उतर चुके हैं। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्होंने राजद (RJD) के टिकट पर छपरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। शुरुआत में खेसारी अपनी पत्नी चंदा देवी को उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन वोटर लिस्ट से जुड़ी तकनीकी अड़चन के कारण अब उन्होंने खुद मैदान संभाल लिया है।
खेसारी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जनता के नाम संदेश जारी करते हुए लिखा, मैं आप सभी का बेटा और भाई, खेसारी लाल यादव, इस बार छपरा विधानसभा से चुनाव लड़ रहा हूं। उन्होंने खुद को पारंपरिक नेता नहीं बल्कि जनता का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि वे ‘खेत-खलिहान के लाल’ और ‘हर तबके की आवाज’ बनकर राजनीति में कदम रख रहे हैं।
खेसारी लाल यादव की लोकप्रियता से आरजेडी को मिलेगा लाभ?
इस घोषणा के साथ ही बिहार की राजनीति में स्टार पावर और सामाजिक समीकरणों का एक नया संगम दिखाई दे रहा है। खेसारी ने अपने संदेश में लालू प्रसाद यादव के संघर्ष और तेजस्वी यादव के युवा नेतृत्व की सराहना करते हुए लिखा कि यही मेरे रास्ते का दीपक हैं। इससे साफ है कि वे RJD की विचारधारा से गहराई से जुड़े हुए हैं और लालू परिवार के प्रति अपनी निष्ठा को खुले तौर पर स्वीकार कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खेसारी लाल यादव की लोकप्रियता, खासकर युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच, RJD के लिए बड़ा लाभ साबित हो सकती है। उनकी छवि एक मेहनतकश, जमीन से जुड़े कलाकार की है, जो पार्टी के पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को और मजबूत करेगी। साथ ही, खुद को “हर तबके की आवाज” बताने से उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि वे जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर विकास की राजनीति करना चाहते हैं।
बीजेपी के गढ़ में आरजेडी बनेगी चुनौती
छपरा विधानसभा सीट, जो पिछले एक दशक से BJP का गढ़ रही है, अब बेहद दिलचस्प मुकाबले की ओर बढ़ रही है। इस बार का चुनाव “स्टार बनाम संगठन” की तरह देखा जा रहा है। एक ओर भोजपुरी सिनेमा का सुपरस्टार खेसारी लाल यादव, और दूसरी ओर भाजपा व जनसुराज के सधे हुए स्थानीय उम्मीदवार।
कुल मिलाकर, खेसारी लाल यादव का राजनीति में प्रवेश केवल एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे सारण क्षेत्र की राजनीति में नई ऊर्जा का संचार कर सकता है। अब देखना यह होगा कि पर्दे पर जनता के दिल जीतने वाले इस “हीरो” का करिश्मा बिहार की सियासत में कितना असर दिखाता है।

