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भाजपा के वरिष्ठ नेता ने टिकट से वंचित होने पर कफ़न ओढ़ा, पार्टी पर लगाया विश्वासघात का आरोप

Senior BJP leader wears shroud after being denied ticket, accuses party of betrayal

द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के बीच एक अभूतपूर्व और विवादित दृश्य देखने को मिला, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता पंडित अजय झा ने टिकट से वंचित किए जाने के विरोध में कफ़न ओढ़कर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक अध्यक्ष और भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पंडित अजय झा ने नरपतगंज या फारबिसगंज सीट से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए और संगठन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

अजय झा ने कहा – ब्राह्मण कुल में जन्म लेना अब अपराध

इस दौरान पंडित अजय झा अपनी पत्नी संजू झा के साथ मीडिया के सामने आए और भावुक हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ब्राह्मण कुल में जन्म लेना अब अपराध है, और आरोप लगाया कि इसी वजह से उन्हें टिकट नहीं मिला। उनका कहना था कि सीमांचल में ब्राह्मणों को सियासत करने का हक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा, मैं 1985 से पार्टी के हित में काम कर रहा हूँ, हर कार्यक्रम में तन, मन और धन से हिस्सा लिया, फिर भी मेरे साथ विश्वासघात किया गया।

पंडित अजय झा ने भाजपा के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के नारों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि स्थानीय सांसद, प्रदेश और राष्ट्रीय नेताओं ने बार-बार उन्हें आश्वासन दिया, लेकिन अंत में उन्हें पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। उन्होंने पार्टी के यह तर्क खारिज कर दिया कि नरपतगंज यादव और फारबिसगंज बनिया समुदाय के लिए आरक्षित हैं। उनका कहना था कि यदि आरक्षण के कारण टिकट नहीं दिया जा सकता, तो उन्हें इतने लंबे समय तक आश्वासन क्यों दिया गया?

निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ेंगे चुनाव

विरोध के रूप में पंडित अजय झा ने कहा कि अब वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ जबरदस्ती कर रहा है और उनकी बलि लेना चाहता है। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को सेंटीमेंटल और भावुक व्यक्ति बताते हुए यह भी कहा कि वह किसी भी सीमा तक जा सकते हैं, लेकिन उनकी पत्नी संजू झा ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस स्थिति में भी भाजपा के फैसले पर सवाल खड़े किए और कहा कि उन्हें केवल ब्राह्मण होने की सज़ा दी गई।

इस विवाद ने बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति और टिकट वितरण पर गंभीर सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं। पंडित अजय झा के इस कदम से पार्टी के भीतर संभावित मतभेद और स्थानीय संगठन की नाखुशी भी उजागर हुई है। उनके कफ़न ओढ़ने का दृश्य और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का निर्णय चुनावी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

Team The Loktantra

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