द लोकतंत्र/ अयोध्या : प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या, रविवार (19 अक्टूबर) की शाम आस्था और भव्यता के अद्भुत संगम से जगमगा उठी। 9वें दीपोत्सव में लाखों दीपों की लौ ने पूरी अयोध्या को प्रकाशमय बना दिया। सरयू तट से लेकर राम की पैड़ी तक दीपों का समंदर बिछ गया। इस भव्य उत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मौजूद रहे और उन्होंने सरयू नदी के तट पर भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रतीकात्मक रूप का राज्याभिषेक कर दीपोत्सव का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के दौरान आरती करते हुए कहा कि आज पूरा उत्तर प्रदेश प्रभु श्रीराम की भक्ति में डूबा है। इस वर्ष एक करोड़ 51 लाख दीपों से प्रदेश आलोकित हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2017 में जब अयोध्या में दीपोत्सव शुरू किया गया था, तब इसका उद्देश्य पूरी दुनिया को यह दिखाना था कि असली दीपावली कैसी होती है वह जो सिर्फ घरों में नहीं, दिलों में भी उजाला करती है।
अयोध्या ‘विकास और विरासत’ का अद्भुत संगम बन चुकी है
योगी ने अपने संबोधन में अयोध्या के विकास और परिवर्तन पर विशेष रूप से जोर दिया। उन्होंने कहा, आज अयोध्या ‘विकास और विरासत’ का अद्भुत संगम बन चुकी है। जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, आज वहीं दीपों की ज्योति चमक रही है। उत्तर प्रदेश अब पहचान के संकट से बाहर निकल चुका है। यह नया उत्तर प्रदेश है जो विरासत को सहेजते हुए विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि राम जन्मभूमि आंदोलन के समय कांग्रेस ने कहा था कि ‘राम एक मिथक हैं,’ जबकि समाजवादी पार्टी की सरकार ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं। योगी ने कहा, जो कभी भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, आज वही राम नाम की चर्चा कर रहे हैं। लेकिन जनभावनाओं को दबाने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
जो बाबर की कब्र पर सजदा करते हैं, वो राम के नाम पर मुंह मोड़ लेते हैं
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण दिया गया, तो कुछ दलों ने उसे अस्वीकार कर दिया। योगी ने तंज कसते हुए कहा, ये वही लोग हैं जो बाबर की कब्र पर सजदा करते हैं, लेकिन जब राम जन्मभूमि बुलाती है, तो मुंह मोड़ लेते हैं।
दीपोत्सव के इस नौवें संस्करण ने न केवल अयोध्या बल्कि पूरे देश में भक्ति और गौरव का माहौल बना दिया है। सरयू घाट पर आरती, रामलीला मंचन और लाखों दीपों की झिलमिल रोशनी ने अयोध्या को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना दिया।

