द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार (8 नवंबर 2025) को उन्होंने अपना छह साल पुराना सोशल मीडिया पोस्ट एक बार फिर साझा किया, जिसमें उन्होंने दिल्ली की खराब हवा को लेकर व्यंग्य किया था। इस पुराने पोस्ट में थरूर ने लिखा था, कब तक जिंदगी काटोगे सिगरेट, बीड़ी और सिगार में? कुछ दिन तो गुजारो दिल्ली-एनसीआर में।
अपने इस पोस्ट को दोबारा शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि छह साल बाद भी हालात जस के तस हैं और यह बेहद दुखद और निराशाजनक है कि दिल्ली की हवा पर सरकारों की उदासीनता जारी है।
दिल्ली की हवा हवा ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी के बीच झूल रही है
दो दिन पहले भी शशि थरूर ने दिल्ली-एनसीआर का AQI शेयर किया था, जिसमें वायु गुणवत्ता सूचकांक 371 दर्ज था। उन्होंने लिखा था कि जैसे-जैसे नवंबर आगे बढ़ता है, लोगों के फेफड़ों पर बोझ बढ़ता जाता है और सांस लेना भी चुनौती बन जाता है। दिवाली के बाद से दिल्ली लगातार प्रदूषण के उच्च स्तर से जूझ रही है और हवा ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी के बीच झूल रही है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शनिवार सुबह 9 बजे राजधानी का औसत AQI 335 रहा, जिससे दिल्ली फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गई। PM 2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया, जिसे फेफड़ों के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसे प्रदूषण में रहना बच्चों, बुजुर्गों और साँस से जु़ड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।
आने वाले दिनों में प्रदूषण के और बढ़ने की आशंका
दिल्ली में तापमान लगातार गिर रहा है और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से तीन डिग्री कम है। मौसम विभाग के अनुसार, ठंड बढ़ने के साथ हवा की गति धीमी होगी और स्मॉग जमता रहेगा, जिससे आने वाले दिनों में प्रदूषण के और बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दी और धीमी हवा प्रदूषकों को वातावरण में ऊपर जाने से रोक देती है, जिस वजह से हवा जहरीली होती जाती है।
सोशल मीडिया पर थरूर का व्यंग्यात्मक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। आम उपयोगकर्ताओं से लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों तक, सभी दिल्ली की हवा को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। कई लोगों ने टिप्पणी की कि नेता तो मास्क पहनकर वायु शोधक कमरों में बैठ सकते हैं, लेकिन आम नागरिक इस जहरीली हवा में जीने को मजबूर हैं। वहीं, कुछ यूज़र्स का कहना है कि यह सिर्फ केंद्र या दिल्ली सरकार का मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राज्यों के बीच समन्वय की कमी का भी परिणाम है।
दिल्ली के प्रदूषण पर यह बहस हर सर्दी में तेज होती है, लेकिन आंकड़ों और वास्तविक हालात को देखकर ऐसा लगता है कि समाधान अभी भी दूर है। फिलहाल विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग सुबह और रात में बाहरी गतिविधियों से बचें, घरों में एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल करें और बाहर निकलते समय N95 मास्क ज़रूर पहनें, क्योंकि दिल्ली की हवा में सांस लेना भी अब जोखिम भरा हो चुका है।

