द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद देश की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एस.टी. हसन ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को INDIA गठबंधन में शामिल करने की खुली मांग की है। उनका मानना है कि अगर विपक्ष एक-दूसरे के खिलाफ लड़ता रहेगा, तो बीजेपी हर बार इसका फायदा उठाती रहेगी, जैसा कि बिहार में साफ दिखाई दिया।
ओवैसी की पार्टी AIMIM को मिली 5 सीटों की जीत ने विपक्षी समीकरणों में नई बहस छेड़ दी है, और इसी संदर्भ में हसन का बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हसन ने कहा कि वे इस मुद्दे पर सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बात करेंगे, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि सपा के अंदर भी इस विषय पर गंभीर मंथन शुरू हो सकता है।
लाल किला कार ब्लास्ट: दोषी डॉक्टरों को फांसी मिलनी चाहिए
इसी बीच, दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट मामले को लेकर एस.टी. हसन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कुछ डॉक्टरों की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद उन्होंने कहा कि डॉक्टर का काम धर्म या जाति देखकर नहीं, बल्कि मरीज की जान बचाना होता है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई डॉक्टर देशविरोधी गतिविधि में शामिल पाया जाता है और अदालत में दोषी सिद्ध होता है, तो उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ब्लास्ट की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं और समाज का एक बड़ा वर्ग डॉक्टरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा रहा है।
VHP पर ST Hasan का हमला, काम ही है हिंदू-मुस्लिम विवाद भड़काना
वहीं मुरादाबाद में डॉक्टरों की नेम प्लेट को लेकर खड़े हुए विवाद पर हसन ने विश्व हिंदू परिषद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि VHP का काम सिर्फ हिंदू-मुस्लिम विवाद भड़काना है और हर मुद्दे में सांप्रदायिक एंगल तलाशकर समाज का माहौल खराब करना इसका मुख्य उद्देश्य बन चुका है।
दूसरी ओर, VHP के केंद्रीय प्रबंध समिति सदस्य डॉ. राजकमल गुप्ता ने प्रवक्ता विनोद बंसल के बयान को निजी राय बताते हुए कहा कि डॉक्टरों का इस तरह की घटनाओं में शामिल होना समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
सपा में ओवैसी पर मंथन? विपक्ष में नया समीकरण बन सकता है
कुल मिलाकर बिहार चुनाव के नतीजों ने पूरे विपक्ष में एक नए प्रकार की बेचैनी पैदा कर दी है। AIMIM की जीत और सपा की ओर से ओवैसी को INDIA गठबंधन में शामिल करने की मांग ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। वहीं लाल किला ब्लास्ट और डॉक्टरों की भूमिका पर उठे सवालों के बीच हसन के बयानों ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही मोर्चों पर गहरी बहस को जन्म दिया है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा विमर्श बन सकता है, खासकर तब जब विपक्ष अगले चुनावों से पहले अपनी एकजुटता को लेकर नए समीकरण तलाश रहा है।

