द लोकतंत्र/ पटना : बिहार चुनाव 2025 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद अब राज्य की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। रविवार को पूरे दिन चली बैठकों, रणनीतियों और दस्तावेज़ी औपचारिकताओं के बाद अब सोमवार सुबह से ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होने जा रही है। चुनाव परिणामों के बाद जिस तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम बदला है, उसने बिहार की राजधानी पटना को एक बार फिर सत्ता के केंद्र में बदल दिया है।
सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद राज्यपाल से मिलेंगे सीएम नीतीश
सोमवार (17 नवंबर) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुबह 11:30 बजे कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मौजूदा मंत्रिमंडल को भंग करने का अंतिम कदम है। बैठक में मंत्रिमंडल भंग करने के प्रस्ताव पर मुहर लगेगी और इसके तुरंत बाद नीतीश कुमार राजभवन जाकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। उनके इस कदम के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने इसकी पुष्टि एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से कर दी है। विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि कैबिनेट मीटिंग के बाद सूचना भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। इससे साफ है कि सोमवार का दिन बिहार की राजनीति में बेहद अहम रहने वाला है जहां एक ओर एक सरकार का अंत होगा, वहीं दूसरी ओर नई सरकार की शुरुआत का रास्ता साफ हो जाएगा।
पटना जिला प्रशासन भी शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरी तरह सक्रिय
इसी बीच पटना जिला प्रशासन भी शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। डीएम की ओर से जारी आदेश में 17 से 20 नवंबर तक गांधी मैदान में आम लोगों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। चार दिन तक मैदान का बंद रहना इस बात का संकेत है कि यही स्थान नई सरकार के शपथ ग्रहण का केंद्र बनने वाला है। सुरक्षा एजेंसियां, प्रशासनिक अधिकारी और आयोजन टीम पहले ही मैदान का निरीक्षण कर तैयारियां शुरू कर चुकी हैं।
सूत्रों का कहना है कि शपथ ग्रहण की संभावित तारीख 19 या 20 नवंबर तय की जा रही है। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक तौर पर यह आयोजन सिर्फ एक शपथ ग्रहण नहीं होगा, बल्कि बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक वापसी का शक्ति-प्रदर्शन भी माना जा रहा है।
एनडीए के नए पावर समीकरण क्या होंगे?
चुनाव नतीजों के बाद से ही पटना के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ है नए चेहरों, नई भूमिकाओं और नई साझेदारियों पर चर्चा जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि एनडीए की नई सरकार में कौन-कौन मंत्री बनेंगे, किसे कौन सा विभाग मिलेगा, और क्या नए कार्यकाल में बिहार की विकास रणनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
साफ है कि आने वाले 48 घंटे बिहार की राजनीति में बेहद अहम होने वाले हैं। सत्ता का ट्रांजिशन, नेतृत्व की दिशा और नई सरकार का एजेंडा सब कुछ अब बहुत जल्दी सामने आने वाला है। बिहार एक नई शुरुआत की दहलीज पर खड़ा है और पूरे देश की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं।

