द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश की श्रम व्यवस्था में स्वतंत्रता के बाद के सबसे बड़े बदलाव की घोषणा की। सरकार ने 29 पुराने श्रमिक कानूनों को समाप्त करते हुए चार नए, आधुनिक और सरल लेबर कोड लागू कर दिए हैं। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इसकी औपचारिक जानकारी साझा करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कामगारों के हित में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट किया कि आजादी के बाद से श्रम क्षेत्र में यह सबसे प्रगतिशील और श्रमिक-केंद्रित सुधार है। उन्होंने कहा कि नए लेबर कोड से देशभर के कामगारों को अधिक सुरक्षा, अधिक अधिकार और गरिमा के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, उद्योगों और कंपनियों के लिए ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी बढ़ावा मिलेगा।
बदलती अर्थव्यवस्था और नए कामगार ढांचे के अनुरूप पहले के कानून अप्रासंगिक
सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड इस प्रकार हैं – वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, और व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता। इन चार कोडों में देश के सभी पुराने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर एक आधुनिक और सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है। सरकार का मानना है कि बदलती अर्थव्यवस्था और नए कामगार ढांचे के अनुरूप पहले के कानून अप्रासंगिक हो रहे थे, ऐसे में नया ढांचा समय की आवश्यकता बन गया था।
नए लेबर कोड का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान है कि देश की हर कंपनी अब अपने प्रत्येक कर्मचारी को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना अनिवार्य होगा। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी। खासतौर पर असंगठित क्षेत्र के करीब 40 करोड़ कामगारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें भी आधिकारिक दस्तावेज और सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी PF, ESIC और पेंशन जैसी सुविधाओं के पात्र
सामाजिक सुरक्षा के दायरे को विस्तृत करते हुए सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी PF, ESIC और पेंशन जैसी सुविधाओं के पात्र होंगे। यह कदम देश की बड़ी वर्कफोर्स को सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। ग्रैच्युटी नियम में किया गया बदलाव भी कर्मचारियों के लिए बड़ा लाभ लेकर आया है। पहले ग्रैच्युटी के लिए किसी भी कंपनी में लगातार 5 वर्ष सेवा करना अनिवार्य था। लेकिन नए लेबर कोड में फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉइज (FTE) को केवल 1 वर्ष की सेवा पर भी ग्रैच्युटी मिल सकेगी। इससे कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिन्हें पहले यह सुविधा नहीं मिल पाती थी।
सरकार ने ओवरटाइम नियमों में भी संशोधन किया है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई कर्मचारी तय समय से अधिक कार्य करता है, तो कंपनी को उसे दोगुना वेतन देना अनिवार्य होगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि कर्मचारियों को वेतन समय पर मिले ताकि आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
चारों नए लेबर कोड भारत के श्रम ढांचे को सरल, पारदर्शी और अधिक श्रमिक-केंद्रित बनाते हैं। सरकार का दावा है कि इससे कामगारों को सुरक्षा, उद्योगों को लचीलापन और देश को रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। ये परिवर्तन भारत की अर्थव्यवस्था को औपचारिक, आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।

