द लोकतंत्र : भारत में कई सालों से लंबित पड़े 4 नए श्रम कानूनों (New Labour Codes) को लागू कर दिया गया है, जो देश के श्रम बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव लाए हैं। इन नए संहिताओं ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त करके उनका स्थान लिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी प्रकार के कर्मचारियों—स्थायी, फिक्स्ड-टर्म, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स—को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इन कानूनों से सैलरी, ग्रेच्युटी, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार के समान अवसरों में कई बड़े और दूरगामी परिवर्तन सुनिश्चित किए गए हैं।
गहन विश्लेषण: कर्मचारियों के 10 बड़े लाभ
नए श्रम कोड कर्मचारियों के हित में निम्नलिखित 10 प्रमुख लाभ सुनिश्चित करते हैं:
- समय पर सैलरी और न्यूनतम सैलरी: नए कानूनों के तहत कर्मचारियों को समय पर सैलरी मिलना अनिवार्य होगा। साथ ही, देशभर में मिनिमम सैलरी (Minimum Salary) का दायरा बढ़ेगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी वेतन इतना कम न हो कि कर्मचारियों का जीवन-यापन कठिन हो।
- ग्रेच्युटी का लाभ: अब कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल का इंतजार नहीं करना होगा। सिर्फ 1 साल की सर्विस पर ही ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। यह लाभ फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी (FTE) और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी स्थायी कर्मचारियों के बराबर मिलेगा।
- सोशल सिक्योरिटी का विस्तार: सभी संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को अनिवार्य नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। पहली बार गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और एग्रीगेटर्स को परिभाषित किया गया है। इन्हें आधार-लिंक्ड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से वेलफेयर बेनिफिट्स (पीएफ, पेंशन, बीमा) प्रदान किए जाएंगे।
- फ्री हेल्थ चेकअप: 40 साल से ज़्यादा उम्र के कर्मचारियों को सालाना फ्री हेल्थ चेकअप दिया जाएगा। केंद्र सरकार मजदूरों की बेहतर सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय मानदंड बनाएगी।
- महिलाओं के लिए समान अवसर: महिलाएँ अब सभी जगहों पर काम कर सकती हैं, जिसमें अंडरग्राउंड माइनिंग, भारी मशीनरी और खतरनाक काम शामिल हैं, जिससे रोजगार के समान अवसर सुनिश्चित होंगे।
- रोजगार और सुरक्षा में वृद्धि: फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई (एफटीई) से रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी और उन्हें स्थायी कर्मचारी के बराबर सामाजिक सुरक्षा, छुट्टी, चिकित्सा जैसे कानूनी फायदे मिलेंगे।
- समान वेतन का अधिकार: महिला-पुरुष भेदभाव कानूनी तौर पर नकार दिया गया है। समान काम के लिए समान वेतन मिलेगा। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में भी काम करने का अधिकार होगा।
- मिनिमम सैलरी की गारंटी: सभी कामगारों के लिए मिनिमम सैलरी की गारंटी होगी। मजदूरों को केंद्र सरकार की ओर से तय की गई फ्लोर वेज (Floor Wage) के हिसाब से वेतन दिया जाएगा।
- प्रवासी कामगारों को लाभ: सभी प्रवासी कामगारों को बराबर वेतन, वेलफेयर बेनिफिट और पीडीएस पोर्टेबिलिटी (राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी) का लाभ दिया जाएगा। कामगार 3 साल तक लंबित बकाए के निपटारे के लिए दावा कर सकते हैं।
- पीएफ, पेंशन और बीमा: सभी डॉक वर्कर्स (Dock Workers) और अन्य कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड, पेंशन और बीमा के लाभ तय कर दिए गए हैं, चाहे वे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हों या अस्थायी कर्मचारी।
इन श्रम संहिताओं का लागू होना देश में औपचारिक रोजगार (Formal Employment) को बढ़ावा देगा, कामगारों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाएगा और उन्हें एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। यह सुधार भारत को एक आधुनिक और न्यायसंगत श्रम बाजार की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगा।

