द लोकतंत्र : भारतीय शेयर बाज़ार में बीते सप्ताह देखने को मिली तीव्र उठा-पटक और अनिश्चितता का सीधा असर देश के कमोडिटी बाज़ार पर पड़ा है। जहाँ एक ओर इक्विटी मार्केट (Equity Market) में स्थिरता का अभाव दिखा, वहीं दूसरी ओर सुरक्षित निवेश के तौर पर पहचान रखने वाले सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले एक सप्ताह में, 24 कैरेट सोने का भाव ₹760 प्रति 10 ग्राम तक बढ़ गया है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत में ₹700 प्रति 10 ग्राम की वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, चांदी की कीमतों में ₹5,000 प्रति किलो की भारी गिरावट दर्ज हुई है, जो बाज़ार के विरोधाभासी रुझान को दर्शाता है।
सोने में निवेश का बढ़ता रुझान
23 नवंबर को, देश की राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,25,990 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोना $4061.91 प्रति औंस के ऊँचे भाव पर कारोबार कर रहा है।
- सुरक्षित निवेश: सोने की कीमतों में यह वृद्धि मुख्य रूप से शेयर बाज़ार की अनिश्चितता से प्रेरित है। जब भी इक्विटी बाज़ारों में अस्थिरता आती है, निवेशक अपने पूँजी को सुरक्षित रखने के लिए सोने (Gold) जैसे सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven Asset) की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी माँग और कीमतों में वृद्धि होती है।
प्रमुख शहरों में भाव: देश के चार प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता दिल्ली कैरेट सोना लगभग ₹1,25,840 से ₹1,25,990 प्रति 10 ग्राम के बीच रहा।
चांदी की गिरावट और वायदा बाज़ार का रुख
सोने के विपरीत, चांदी में बड़ी गिरावट देखी गई है। एक सप्ताह में चांदी का भाव ₹5,000 प्रति किलो सस्ता हो गया, और 23 नवंबर को इसका भाव ₹1,64,000 प्रति किलो दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में चांदी का वायदा भाव $49.56 प्रति औंस है।
वायदा बाज़ार (Futures Market) में स्थिति:
- गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट: एमसीएक्स (MCX) पर 5 दिसंबर 2025 को एक्सपायर होने वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट के दाम एक सप्ताह में ₹123,561 से बढ़कर ₹124,191 प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गए, जो स्पॉट मार्केट (Spot Market) के रुझान की पुष्टि करता है।
- सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट: इसी अवधि में चांदी के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज हुई। 14 नवंबर को ₹1,56,018 प्रति किलोग्राम का भाव घटकर ₹1,54,151 पर आ गया।
सोने और चांदी की कीमतें घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के फैक्टर्स से प्रभावित होती हैं। सोने में वृद्धि मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं, भू-राजनीतिक तनावों और घरेलू शेयर बाज़ार में आई अनिश्चितता का परिणाम है। वहीं, चांदी में आई गिरावट संभवतः औद्योगिक माँग में कमी या बाज़ार की सट्टेबाजी (Market Speculation) के कारण हो सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इन कमोडिटीज़ में निवेश करते समय इन घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कारकों का गहन विश्लेषण करें।

