द लोकतंत्र : इथियोपिया के Hayli Gubbi क्षेत्र में 10,000 साल बाद हुए भीषण ज्वालामुखी विस्फोट के बाद उत्पन्न हुआ राख और सल्फर डाइऑक्साइड का विशाल गुबार अब भौगोलिक दूरी को पार करते हुए उत्तर-पश्चिम भारत और दिल्ली तक पहुँच गया है। इस अप्रत्याशित पर्यावरणीय घटना का सीधा असर राष्ट्रीय राजधानी सहित कई शहरों की हवाई सेवाओं पर देखने को मिला है। भारत की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एहतियाती कदम उठाए हैं और कई अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू उड़ानें रद्द कर दी हैं।
वायुमंडल में राख की गति और फैलाव
हवामान विशेषज्ञों ने इस राख के गुबार के फैलाव और गति को लेकर चिंता व्यक्त की है।
- गति और रूट: विशेषज्ञों के अनुसार, यह राख का गुबार विस्फोट के बाद हवा में उठा और करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लाल सागर को पार करते हुए भारतीय हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ गया।
- गंभीरता: ज्वालामुखी से निकली यह राख अत्यंत बारीक और कांच जैसे कणों से युक्त होती है, जो विमानों के जेट इंजनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। यह इंजन के प्रदर्शन को कम कर सकती है, जिससे बड़ी दुर्घटना का जोखिम उत्पन्न होता है।
एयर इंडिया का एहतियाती कदम
राख की परत के भारतीय हवाई क्षेत्र में पहुँचने और सुरक्षा खतरों को देखते हुए एयर इंडिया ने तत्काल प्रतिक्रिया दी है।
- तकनीकी जांच: एयरलाइन ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि जिन विमानों ने ज्वालामुखी विस्फोट के बाद प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरी थी, उन पर विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है।
- उड़ानों का स्थगन: इसी व्यापक तकनीकी जांच प्रक्रिया और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 24 नवंबर और 25 नवंबर की कई उड़ानों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
प्रभावित उड़ानें (सूची)
25 नवंबर (मंगलवार) की रद्द उड़ानें:
- AI 2822 – चेन्नई → मुंबई
- AI 2466 – हैदराबाद → दिल्ली
- AI 2444 / AI 2445 – मुंबई → हैदराबाद → मुंबई
- AI 2471 / AI 2472 – मुंबई → कोलकाता → मुंबई
24 नवंबर (सोमवार) की रद्द उड़ानें:
- AI 106 – न्यूआर्क → दिल्ली
- AI 102 – न्यूयॉर्क (JFK) → दिल्ली
- AI 2204 – दुबई → हैदराबाद
- AI 2290 – दोहा → मुंबई, तथा अन्य गंतव्यों की उड़ानें।
यात्रियों के लिए व्यवस्था
एयर इंडिया ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को नेटवर्क पर मौजूद ग्राउंड टीम द्वारा लगातार अपडेट दिया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर यात्रियों को होटल व्यवस्था और वैकल्पिक यात्रा विकल्प भी मुहैया कराए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर यह घटना अंतर्राष्ट्रीय हवाई सुरक्षा प्रोटोकॉल की महत्ता को दर्शाती है और बताती है कि कैसे भौगोलिक रूप से दूर की प्राकृतिक आपदाएँ भी आधुनिक विमानन नेटवर्क को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। तकनीकी जांच पूरी होने और राख का गुबार छंटने के बाद ही हवाई सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद है।

