द लोकतंत्र : वाराणसी में पिछले कुछ महीनों में कोडाइन आधारित कफ सिरप की अवैध तस्करी का एक विशाल नेटवर्क पकड़ा जाना राष्ट्रीय नियामक व्यवस्था और जन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। फर्जी फार्मा कंपनियों और नाममात्र के मेडिकल स्टोर्स के नाम पर लाखों बोतलें न केवल अलग-अलग राज्यों बल्कि पड़ोसी देशों तक भी भेजी जा रही थीं। जाँच में पता चला है कि कई कंपनियाँ तो सिर्फ कागज़ों पर मौजूद थीं, जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था। प्रशासन ने अब तक कई लाख बोतलें जब्त करके दर्जनों FIR दर्ज की हैं। यह पूरा मामला कफ सिरप के नशे के रूप में गलत इस्तेमाल और इसकी गैरकानूनी सप्लाई की चुनौती को रेखांकित करता है।
कोडाइन: तुरंत राहत, घातक लत
कोडाइन को कफ सिरप में शामिल करने का मुख्य कारण इसकी चिकित्सकीय प्रभावशीलता है, लेकिन यही गुण इसके दुरुपयोग का कारण भी बनता है।
- कफ सप्रेसेंट (Cough Suppressant): दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग के डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि कोडाइन एक ओपिऑइड (opioid) दवा है, जो खाँसी को तुरंत शांत करने का काम करती है। यह मस्तिष्क के उस हिस्से पर सीधा असर करती है जो खाँसी का सिग्नल भेजता है, जिससे सूखी, तेज और लगातार आने वाली खाँसी में तुरंत राहत मिलती है।
- लत का खतरा: डॉ. गिरि के अनुसार, कोडाइन एक ओपिऑइड होने के कारण शरीर को आराम और हल्की नींद जैसा असर देता है। यह मनोवैज्ञानिक प्रभाव इसे बार-बार लेने की इच्छा को बढ़ाता है, जिससे लत लगने की संभावना बढ़ जाती है।
नुकसान: ओवरडोज और जान का जोखिम
विशेषज्ञों ने कोडाइन सिरप के लंबे समय तक सेवन से होने वाले गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसानों पर चेतावनी दी है।
- गंभीर दुष्प्रभाव: लगातार सेवन से शारीरिक निर्भरता बढ़ती है और कम मात्रा धीरे-धीरे असर करना बंद कर देती है।
- जान का खतरा: ओवरडोज होने पर सांस धीमी पड़ सकती है (रेस्पिरेटरी डिप्रेशन), गंभीर उलझन, बेहोशी, लो ब्लड प्रेशर और कभी-कभी जान का खतरा भी हो सकता है। प्रेगनेंट महिलाओं, बच्चों और पहले से बीमार लोगों में इसके साइड इफेक्ट और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं।
नियामक सख्ती और निगरानी की आवश्यकता
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में डॉ. एल.एच. घोटेकर ने बाजार में कोडाइन सिरप की बढ़ती तस्करी का मुख्य कारण इसके नशे की तरह इस्तेमाल होना बताया है, जिससे युवा तेजी से प्रभावित हो रहे हैं।
- सख्त कार्रवाई: डॉ. घोटेकर ने जोर दिया कि फर्जी कंपनियों के जरिए की जाने वाली सप्लाई को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। ऐसी नियंत्रित दवाओं की बिक्री पर सख्त निगरानी ज़रूरी है ताकि इसका गलत उपयोग कम हो सके।
कोडाइन सिरप की अवैध बिक्री ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, जिसके समाधान के लिए सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और चिकित्सा समुदाय को तत्काल सहयोग करना होगा।

