द लोकतंत्र : आज के दौर में जब विवाह समारोह अक्सर भव्यता, दिखावे और आधुनिकता का प्रतीक बनते जा रहे हैं, तब मशहूर कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के ‘वैदिक विवाह’ ने एक अलग और प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उनके विवाह निमंत्रण पत्र पर साफ लिखा था– वैदिक विवाह, जिसका अर्थ है कि यह पूरा संस्कार ऋषि-मुनियों की प्राचीन परंपराओं, शुद्ध मंत्रों और वेद के नियमों के अनुसार संपन्न हुआ। इस तरह के विवाह ने आम जनता के मन में भी इस पवित्र संस्कार के मूल सिद्धांतों को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न कर दी है।
क्या है वैदिक विवाह?
वैदिक विवाह हिंदू धर्म का सबसे पुराना और पवित्र विवाह संस्कार माना जाता है। इसकी जड़ें सीधे तौर पर हमारे प्राचीनतम ग्रंथों ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद से जुड़ी हुई हैं। यह केवल एक सामाजिक उत्सव नहीं है, बल्कि इसे जीवन के सोलह प्रमुख संस्कारों में से एक माना जाता है।
- मंत्रों का महत्व: इस विवाह में सबसे ज्यादा जोर मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, पवित्र अग्नि (यज्ञ) के सामने शपथ लेने, और दूल्हा-दुल्हन द्वारा अपने जीवन में धर्म, सत्य, प्रेम और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के संकल्प पर होता है।
- संस्कार की भावना: यह विवाह दिखावे से दूर रहकर, दाम्पत्य जीवन के गहरे और आध्यात्मिक अर्थ को स्थापित करता है।
सात नहीं, चार फेरों का गहरा अर्थ
वैदिक विवाह की एक सबसे खास पहचान है फेरों की संख्या और उसका अर्थ। परंपरागत रूप से आधुनिक शादियों में सात फेरे लिए जाते हैं, लेकिन शुद्ध वैदिक परंपरा में पवित्र अग्नि के चारों ओर केवल चार बार घूमा जाता है। ये चार फेरे जीवन के चार महत्वपूर्ण पुरुषार्थों का प्रतिनिधित्व करते हैं:
- धर्म: पहला फेरा धर्म का होता है, जिसमें दंपत्ति मिलकर अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने का वचन लेते हैं।
- अर्थ: दूसरा फेरा अर्थ यानी समृद्धि और धन की मेहनत से प्राप्ति का संकल्प है।
- काम: तीसरा फेरा काम का अर्थ है प्रेम, सुख और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना।
- मोक्ष: चौथा फेरा मोक्ष का होता है, जिसमें मिलकर आध्यात्मिक विकास और जीवन में परम शांति पाने का संकल्प लिया जाता है।
सप्तपदी: सात वचनों की आधारशिला
चार फेरों के बाद सप्तपदी यानी सात कदम की रस्म संपन्न होती है। इन सात कदमों में दूल्हा-दुल्हन एक अखंड और आदर्श दाम्पत्य जीवन के लिए सात महत्वपूर्ण वचन लेते हैं। ये वचन सिर्फ सुख में ही नहीं, बल्कि दुख, जिम्मेदारी और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी एक-दूसरे का साथ देने का प्रण होते हैं। वैदिक विवाह वास्तव में जीवन के गंभीर सिद्धांतों को समझकर और स्वीकार करके दो व्यक्तियों का मिलन है।

