द लोकतंत्र : दिसंबर का महीना शुरू होते ही ठंड की बढ़ती लहर के साथ ही बच्चों में सर्दी-खांसी के मामले बढ़ने लगे हैं। तापमान में गिरावट आने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर पड़ने लगती है, जिसके चलते बहती नाक, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। छोटे बच्चों में यह परेशानी और अधिक होती है, क्योंकि वे अपनी पीड़ा को पूरी तरह से व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में, कई माता-पिता तुरंत राहत के लिए भाप (Steam Inhalation) देने का घरेलू उपाय अपनाते हैं। इस उपाय की सुरक्षा और उपयोगिता पर एम्स, दिल्ली के पीडियाट्रिक विभाग के डॉ। हिमांशु भदानी ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
बच्चों के लिए भाप का वैज्ञानिक आधार
डॉ। हिमांशु भदानी ने स्पष्ट किया कि सर्दी-खांसी में बच्चों को हल्की भाप देना बिल्कुल सही और लाभदायक है। यह प्राकृतिक उपचार कई तरह से बच्चे को राहत पहुँचाता है।
- नाक की जकड़न में कमी: भाप लेने से नाक की जकड़न कम होती है और सूखी नाक को नमी मिलती है।
- सांस नलियों का खुलना: गर्म भाप बंद हुई सांस की नलियों को खोलने में मदद करती है, जिससे बच्चे को सांस लेने में आसानी होती है।
- बलगम को ढीला करना: भाप का गर्म असर जमे हुए बलगम को ढीला करता है, जिससे खांसी करते समय बच्चे को बलगम बाहर निकालने में आसानी होती है और गले की खराश में भी आराम मिलता है।
सुरक्षित भाप देने की विधि और सावधानियाँ
डॉ। भदानी ने चेताया है कि बिना जानकारी के लगातार भाप देना या अत्यधिक गर्म भाप देना बच्चे की नाज़ुक त्वचा और श्वास नलियों को नुकसान पहुँचा सकता है।
- मात्रा और समय: बच्चों को भाप हमेशा सीमित मात्रा में और आवश्यकतानुसार ही देनी चाहिए। दिन में केवल एक या दो बार हल्की भाप देना पर्याप्त है। हर बार भाप का समय 5 से 7 मिनट से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
- तापमान का ध्यान रखें: भाप हमेशा हल्की और कम तापमान वाली होनी चाहिए ताकि जलने (Scalding) का जोखिम न हो।
- छोटे बच्चों के लिए विशेष उपाय: 1 साल से कम उम्र के बच्चों को सीधे भाप के सामने न बैठाएं। इसके बजाय, कमरे में गरम पानी का कटोरा या स्टीमर रखकर हल्की भाप फैलने दें ताकि उन्हें नमी मिले। भाप देते समय बच्चे पर पूरा ध्यान रखें और किसी भी असुविधा या जलन के संकेत मिलने पर उपाय तुरंत बंद कर दें।
यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि सुरक्षित तरीके और सीमित मात्रा में दी गई भाप बच्चों को सर्दी-खांसी की शुरुआत में अत्यधिक राहत प्रदान करती है, किन्तु अति और लापरवाही हानिकारक हो सकती है।

