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दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम: उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद Fee Regulation Act 2025 नोटिफाई; जानें तीन-स्तरीय निगरानी व्यवस्था

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द लोकतंत्र : देश की राजधानी दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलने की पुरानी समस्या पर रोक लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक कानून को आधिकारिक रूप से नोटिफाई कर दिया है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा ‘दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस तय करने और नियमन) एक्ट, 2025’ का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यह कानून तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसकी सीधी गिरफ्त में अब दिल्ली के 1500 से अधिक निजी अनएडेड स्कूल आ गए हैं।

फीस संरचना में स्पष्टता और प्रतिबंध

इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य फीस की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

  • फीस का दायरा: कानून के मुताबिक, स्कूल सिर्फ वही फीस वसूल सकते हैं, जो स्पष्ट रूप से तय और मंजूर की गई हो। प्रत्येक फीस हेड को अलग-अलग और स्पष्ट तरीके से दर्शाना अनिवार्य होगा। ‘एक्सेस फीस’ यानी ज़रूरत से ज़्यादा फीस वसूलना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
  • ट्यूशन फीस का परिभाषा: ट्यूशन फीस में अब सिर्फ रोजमर्रा के खर्च और सीधे पढ़ाई से जुड़े खर्च ही शामिल होंगे। बिल्डिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर या किसी बड़ी पूंजीगत खर्च की भरपाई ट्यूशन फीस से नहीं की जा सकेगी। इससे स्कूलों को गैर-शैक्षणिक खर्चों के लिए अभिभावकों पर अतिरिक्त भार डालने से रोका जाएगा।

तीन-स्तरीय निगरानी एवं शिकायत व्यवस्था

फीस विवादों के समाधान के लिए इस कानून के तहत एक मजबूत तीन-स्तरीय निगरानी व्यवस्था स्थापित की गई है।

  • स्कूल-स्तरीय फीस रेगुलेशन कमेटी: यह कमेटी हर तीन साल के लिए स्कूल की फीस संरचना को मंजूरी देगी। इसमें अभिभावक (महिला और कमजोर वर्ग के प्रतिनिधित्व सहित), शिक्षक, प्रबंधन प्रतिनिधि, प्रिंसिपल और शिक्षा विभाग का एक पर्यवेक्षक शामिल होगा। फीस बढ़ाने के लिए ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट देना अनिवार्य होगा।
  • जिला फीस अपीलेट कमेटी: स्कूल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कम से कम 15 फीसद अभिभावकों का समर्थन आवश्यक होगा। यह कमेटी हर साल 15 जुलाई को बनाई जाएगी और सभी मामलों का निपटारा 30 जुलाई तक करना होगा।
  • रिवीजन कमेटी: जिला स्तर के फैसले से असंतुष्ट होने पर 30 से 45 दिनों के भीतर अपील रिवीजन कमेटी में होगी। यह कमेटी 45 दिनों में फैसला सुनाएगी, जो अंतिम माना जाएगा और तीन साल तक लागू रहेगा।

यह कानून दिल्ली में शिक्षा को सभी के लिए अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Team The Loktantra

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