द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की दावेदारी लगभग तय मानी जा रही है। शनिवार को प्रदेश कार्यालय में नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने एबीपी न्यूज़ से कहा कि यह एक “बड़ी जिम्मेदारी” है और वह पूरे प्रदेश में तन-मन-धन से काम करेंगे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में वे अभी से जुट जाएंगे।
पंकज चौधरी ने बताया कि उन्होंने पांच सेट में नामांकन दाखिल किया है, और किसी अन्य दावेदार के नामांकन की जानकारी उनके पास नहीं है। अब 14 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल यूपी बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम औपचारिक रूप से घोषित करेंगे। नामांकन के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक और वरिष्ठ नेता स्वतंत्र देव सिंह सहित शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि पार्टी उनके नाम पर लगभग सहमत है।
सात बार के सांसद और ओबीसी का मजबूत चेहरा
महाराजगंज से सात बार सांसद रहे पंकज चौधरी केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं। वे कुर्मी समाज से आते हैं, जो यूपी में यादवों के बाद ओबीसी वर्ग का सबसे बड़ा वोट बैंक है। यही कारण है कि पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सामाजिक संतुलन साधने और सपा के PDA (पटेल-दलित-अल्पसंख्यक) समीकरण का मुकाबला करने के लिए पंकज चौधरी पर दांव लगाने का फैसला किया है।
उनका राजनीतिक सफर भी लंबे अनुभव और संगठन कौशल का प्रमाण है। 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के रूप में राजनीति शुरू करने वाले चौधरी बाद में डिप्टी मेयर बने और फिर 1991 में पहली बार महराजगंज से सांसद चुने गए। वे 10वीं, 11वीं, 12वीं, 14वीं, 16वीं, 17वीं और 18वीं लोकसभा के सदस्य रहे हैं। उनकी निरंतर पकड़ और कार्यशैली ने उन्हें संगठन के भीतर एक विश्वसनीय और संतुलित नेता के रूप में स्थापित किया है।
पीएम मोदी की ‘विशेष तवज्जो’ ने बढ़ाया कद
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि गीता प्रेस शताब्दी समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक उनके घर पहुंचे थे। पीएम का यह कदम न केवल उनके राजनीतिक कद को बढ़ाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि हाईकमान उन्हें कितना महत्व देता है। पीएम मोदी को पंकज चौधरी के घर तक पहुंचने के लिए पुरानी गलियों से पैदल गुजरना पड़ा था—यह घटना पूर्वांचल और कुर्मी समाज में उनके प्रभाव को और मजबूत करती है।
बीजेपी क्यों चाहती है पंकज चौधरी को राज्य अध्यक्ष बनाना?
चौधरी न केवल संगठन के भीतर लोकप्रिय हैं, बल्कि ओबीसी वर्ग में भी उनकी पैठ बेहद मजबूत है। चुनावी दृष्टि से देखें तो यूपी में भाजपा का परंपरागत वोट बैंक तो है ही, लेकिन सपा के PDA फार्मूले का जवाब देने के लिए पिछड़े वर्ग में मजबूत नेता की जरूरत थी—और इस समीकरण पर पंकज चौधरी बिल्कुल फिट बैठते हैं।
उनकी साफ-सुथरी छवि, लंबे अनुभव, संघ से निकटता और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद उन्हें अध्यक्ष पद के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाता है। भाजपा संगठन में उनकी स्वीकार्यता इतनी है कि उनके नामांकन के दौरान प्रदेश नेतृत्व की पूरी टीम उपस्थित रही।
पूर्वांचल में बढ़ेगी पकड़, प्रदेश में बदलेगा समीकरण
पंकज चौधरी नए प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं, तो यह पूर्वांचल की मजबूती को और बढ़ाएगा। पहले से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं, ऐसे में पूर्वांचल का राजनीतिक प्रभाव और मजबूत होगा। महाराजगंज और आसपास के जिलों में इस संभावना के बाद उत्साह का माहौल है।
महाराजगंज जिला अध्यक्ष संजय पांडे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ पहुंच चुके हैं। घोषणा होते ही उनका भव्य स्वागत करने की तैयारी है। जिले से सात वोटर मतदान में हिस्सा लेंगे।

