द लोकतंत्र : देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता के गंभीर स्तर ने अब आर्थिक चक्र को प्रभावित करना प्रारंभ कर दिया है। जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्ली के प्रमुख खुदरा (Retail) बाजारों में ग्राहकों की उपस्थिति में लगभग 75 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, सामान्य दिनों में एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से 3 से 4 लाख लोग खरीदारी के लिए पहुंचते थे, परंतु वर्तमान में यह संख्या महज एक लाख तक सिमट कर रह गई है।
त्योहारी सीजन पर खतरा और व्यापारिक चिंता
प्रदूषण के कारण उत्पन्न हुई यह स्थिति ऐसे समय पर आई है जब बाजार क्रिसमस और नव वर्ष की तैयारियों में व्यस्त थे।
- ग्राहक मनोविज्ञान: स्वास्थ्य चेतावनी और शारीरिक कष्टों जैसे आंखों में जलन एवं सांस की तकलीफ के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार, बुजुर्गों और बच्चों की अनुपस्थिति ने बाजारों को सूना कर दिया है।
- संभावनाओं पर आघात: सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, दिसंबर का महीना व्यापार की दृष्टि से स्वर्ण अवसर होता है, परंतु इस वर्ष प्रदूषण ने कारोबार की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
राजनीतिक हस्तक्षेप और साझा रणनीति की मांग
व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण की समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे शहरों में भी AQI गंभीर श्रेणी में बना हुआ है।
- आपातकालीन बैठक: सीटीआई ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को एक औपचारिक पत्र लिखकर तत्काल इमरजेंसी मीटिंग बुलाने का आग्रह किया है। उनकी मांग है कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान की सरकारें एक मंच पर आकर साझा रणनीति तैयार करें।
- व्यापारियों का समर्थन: दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारी सरकार के कड़े कदमों का समर्थन करने को तैयार हैं। मार्केट एसोसिएशन ने संकेत दिए हैं कि यदि बाजारों के समय में परिवर्तन करने जैसे उपाय किए जाते हैं, तो वे पूर्ण सहयोग देंगे।
भविष्य का विश्लेषण: रिटेल सेक्टर के लिए चुनौतियां
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वायु प्रदूषण पर अगले एक सप्ताह में नियंत्रण नहीं पाया गया, तो दिल्ली के रिटेल सेक्टर को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है। जहरीली हवा न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) को भी बाधित कर रही है। निश्चित रूप से, राजधानी की आर्थिक रौनक वापस लाने के लिए पर्यावरण सुधार ही एकमात्र स्थायी समाधान है।

