द लोकतंत्र : भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर चिंताएं एक बार फिर गहरा गई हैं। सोमवार, 22 दिसंबर 2025 की सुबह दिल्ली से मुंबई के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI887 को तकनीकी खराबी के कारण आपातकालीन स्थिति में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वापस लैंड कराना पड़ा। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान का एक इंजन पूरी तरह से बंद हो गया था, जिसके बाद पायलटों ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करते हुए विमान को सकुशल भूमि पर उतारा।
घटनाक्रम का विश्लेषण: 42 मिनट का तनावपूर्ण सफर
फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, विमान ने प्रातः 6:10 बजे उड़ान भरी थी और लगभग 6:52 बजे इसकी वापसी हुई।
- विमान संख्या VT-ALS में आई खराबी के बावजूद बड़ा हादसा इसलिए टला क्योंकि आधुनिक दो इंजन वाले विमान एक इंजन पर भी सुरक्षित उड़ान भरने और लैंड करने में सक्षम होते हैं। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि सभी यात्री और चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें वैकल्पिक उड़ानों के माध्यम से गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा इतिहास: अतीत के जख्म और वर्तमान की चुनौतियां
एयर इंडिया के लिए यह घटना अत्यंत संवेदनशील समय पर आई है। गौरतलब है कि इसी वर्ष 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI171 के क्रैश होने से विमानन जगत दहल गया था, जिसमें 241 लोगों में से मात्र एक व्यक्ति जीवित बचा था। उस भीषण हादसे के बाद से नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने सुरक्षा ऑडिट कड़े कर दिए हैं, फिर भी तकनीकी विफलताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
विशेषज्ञ राय और भविष्य का प्रभाव
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन बंद होने के कारणों की गहन जांच होनी चाहिए। क्या यह रखरखाव (Maintenance) की कमी है या कोई मैकेनिकल त्रुटि, यह जांच का विषय है।
- प्रशासनिक कार्रवाई: डीजीसीए इस मामले में विमान के ब्लैक बॉक्स और इंजन डेटा का विश्लेषण करेगा।
- यात्री विश्वास: बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं एयरलाइन की छवि और यात्रियों के भरोसे को चोट पहुंचाती हैं। भविष्य में, एयर इंडिया को अपने बेड़े के आधुनिकीकरण और नियमित मेंटेनेंस प्रोटोकॉल पर भारी निवेश करने की आवश्यकता होगी।
निष्कर्षतः, AI887 की सुरक्षित लैंडिंग चालक दल की सूझबूझ का परिणाम है, किंतु यह घटना एक गंभीर चेतावनी भी है। विमानन क्षेत्र में शून्य त्रुटि (Zero Error) का लक्ष्य ही आकाश को सुरक्षित बना सकता है।

