द लोकतंत्र : वर्ष 2025 भारतीय खान-पान के इतिहास में एक ऐसे कालखंड के रूप में दर्ज किया जाएगा, जहाँ पारंपरिक स्वाद और वैश्विक व्यंजनों का अभूतपूर्व मिलन हुआ। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने सरहदों को धुंधला कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान की गलियों से निकले कबाब और मिडिल ईस्ट की शाही मिठाइयों ने भारतीय रेस्तरां के मेन्यू में स्थायी जगह बना ली है। खाद्य विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक नया अध्याय है।
कराची का चपली कबाब
- इस वर्ष स्ट्रीट फूड की दुनिया में चपली कबाब सबसे बड़ा नाम बनकर उभरा है। मूलतः पश्तून संस्कृति से निकला यह व्यंजन अपने विशिष्ट चपटे आकार और तीखे मसालों के लिए जाना जाता है। दिल्ली के पुराने इलाकों से लेकर आधुनिक कैफे तक, कीमे को अनारदाने और अजवाइन के साथ मिश्रित कर बनाया गया यह कबाब फूड व्लॉगर्स की पहली पसंद बना हुआ है।
बकलावा
- मिडिल ईस्ट की मशहूर मिठाई बकलावा ने भारतीय मिठाइयों के बाजार को नई चुनौती दी है। फिलो पेस्ट्री की सैकड़ों महीन परतों, पिस्ता, अखरोट और शहद का यह मिश्रण वर्ष 2025 में गिफ्टिंग का एक लग्जरी विकल्प बन गया है। उपभोक्ता अब इसे विशिष्ट अवसरों पर दुबई और तुर्की से सीधे मंगवा रहे हैं, जिसने भारत में प्रीमियम कन्फेक्शनरी मार्केट को गति प्रदान की है।
कांजी और गोंद कतीरा
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक वर्ग ने पारंपरिक पेय पदार्थों को पुनः प्रतिष्ठित किया है:
- चुकंदर की कांजी: एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक के रूप में, कांजी ने सर्दियों में पाचन सुधारने हेतु वापसी की है। यह न केवल स्वास्थ्यवर्धक है, बल्कि इसका चमकीला बैंगनी रंग इसे इंस्टाग्राम पर अत्यधिक लोकप्रिय बनाता है।
- गोंद कतीरा: भीषण गर्मी के दौरान, शरीर को ठंडा रखने के लिए गोंद कतीरा का उपयोग एक प्रमुख ट्रेंड रहा। इसे आधुनिक मॉकटेल्स में शामिल करना 2025 की विशेषता रही।
जापानी रामेन का क्रेज
- युवाओं के बीच जापानी संस्कृति और एनीमे के प्रभाव ने रामेन को एक अनिवार्य व्यंजन बना दिया है। मसालेदार ब्रॉथ और नूडल्स का यह कॉम्बिनेशन सर्दियों के मौसम में ‘कंफर्ट फूड’ की श्रेणी में शीर्ष पर है।
आने वाले वर्ष में, विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय फूड मार्केट में ‘हाइब्रिड फूड’ का चलन बढ़ेगा, जैसे बकलावा के स्वाद वाली भारतीय मिठाइयां या देसी तड़के वाला रामेन। जैसे-जैसे लोग नए अनुभवों के लिए तैयार हो रहे हैं, खाद्य उद्योग नवाचार के नए शिखर छूने के लिए तैयार है।
निष्कर्षतः, 2025 ने सिद्ध कर दिया है कि स्वाद की कोई सीमा नहीं होती। चाहे वह चपली कबाब का तीखापन हो या कांजी की खटास, भारतीय फूड लवर्स ने हर जायके को खुले दिल से अपनाया है।

