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धुरंधर के विवादित डायलॉग पर गुजरात हाई कोर्ट में याचिका; बलोच समुदाय ने जताई आपत्ति, सेंसर बोर्ड को नोटिस

The loktnatra

द लोकतंत्र : बॉक्स ऑफिस पर कीर्तिमान स्थापित कर रही निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ अब गंभीर कानूनी विवाद में फंसती नजर आ रही है। बलोच समुदाय के सदस्यों ने फिल्म के एक विशिष्ट संवाद को अपमानजनक और ‘हेट स्पीच’ (Hate Speech) करार देते हुए गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि फिल्म में एक पूरे समुदाय की निष्ठा पर प्रश्न चिह्न लगाना न केवल नैतिक रूप से गलत है, अपितु यह सामाजिक सौहार्द को भी बिगाड़ सकता है।

संजय दत्त का वह संवाद

फिल्म में संजय दत्त द्वारा निभाए गए पात्र ‘चौधरी असलम’ के एक डायलॉग ने बवाल मचा दिया है।

फिल्म के एक दृश्य में संजय दत्त कहते हैं, “मगरमच्छ पर भरोसा कर सकते हैं, पर बलोच पर नहीं।”

गांधीनगर के यासीन बलोच और बनासकांठा के अयूब खान बलोच ने अपनी याचिका में कहा है कि यह संवाद बलोच समुदाय को नकारात्मक रूप से लक्षित करता है। उन्होंने संविधान की धारा 19(2) का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी जाति या समुदाय का अपमान नहीं किया जा सकता।

सीबीएफसी को रिव्यू का आदेश

याचिकाकर्ताओं ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

  • कोर्ट से मांग की गई है कि जब तक यह डायलॉग सभी वर्जन (डिजिटल और थिएट्रिकल) से हटाया या म्यूट नहीं किया जाता, तब तक फिल्म के प्रदर्शन पर पुनर्विचार होना चाहिए।
  • याचिका में अदालत से सीबीएफसी को फिल्म का दोबारा रिव्यू करने के लिए निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है।

बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर’ की विजय गाथा

कानूनी पेचीदगियों और प्रोपेगैंडा के आरोपों के बावजूद, फिल्म व्यावसायिक रूप से अजेय बनी हुई है।

  • रिलीज के 19 दिनों में फिल्म ने घरेलू बाजार में ₹590 करोड़ और वैश्विक स्तर पर ₹907 करोड़ बटोर लिए हैं।
  • इसने ‘कांतारा चैप्टर 1’ जैसी दिग्गज फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए ऑलटाइम टॉप 10 में जगह बना ली है। ट्रेड एनालिस्टों का अनुमान है कि दिसंबर के अंत तक यह ₹1000 करोड़ का आंकड़ा छू लेगी।

सिनेमा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद अक्सर फिल्म की जिज्ञासा को बढ़ाते हैं, किंतु संवैधानिक दृष्टिकोण से यह एक बड़ा प्रश्न है। यदि अदालत का फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आता है, तो यह भविष्य में ऐतिहासिक और राजनीतिक फिल्मों के लेखन के लिए एक नया उदाहरण सेट करेगा।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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