द लोकतंत्र : भारतीय मनोरंजन जगत में टीवी से बॉलीवुड का सफर सदैव चर्चा का विषय रहा है। जहाँ शाहरुख खान, सुशांत सिंह राजपूत और इरफान खान जैसे दिग्गजों ने छोटे पर्दे की सीमित परिधि से निकलकर वैश्विक सिनेमा पर राज किया, वहीं एक लंबी फेहरिस्त उन कलाकारों की भी है जिन्हें टीवी पर तो अपार प्रेम मिला, किंतु सिल्वर स्क्रीन ने उन्हें नकार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि टीवी की ‘ओवर-एक्सपोज़र’ छवि और फिल्मों में सही स्क्रिप्ट का चुनाव न कर पाना इन सितारों के लिए बाधक सिद्ध हुआ है।
सिल्वर स्क्रीन पर संघर्षरत नाम
टीवी इंडस्ट्री के कई ऐसे दिग्गज हैं जिनकी शुरुआत धमाकेदार रही, परंतु अंजाम औसत रहा।
- अंकिता लोखंडे: ‘पवित्र रिश्ता’ से घर-घर में पहचान बनाने वाली अंकिता ने ‘मणिकर्णिका’ और ‘वीर सावरकर’ जैसी महत्वाकांक्षी फिल्मों में अभिनय किया, किंतु वे एक स्वतंत्र कमर्शियल स्टार के रूप में स्वयं को स्थापित नहीं कर सकीं।
- करण सिंह ग्रोवर: टीवी के सुपरस्टार करण ने ‘अलोन’ और ‘हेट स्टोरी 3’ के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा। यद्यपि हालिया फिल्म ‘फाइटर’ में उनकी भूमिका सराहनीय थी, किंतु वे सोलो-लीड के तौर पर सफलता का स्वाद नहीं चख सके।
- राजीव खंडेलवाल: ‘कहीं तो होगा’ के चॉकलेट बॉय राजीव ने ‘आमिर’ और ‘टेबल नंबर 21’ जैसी गहन फिल्में दीं। उनके अभिनय की प्रशंसा हुई, किंतु बॉलीवुड की मुख्यधारा में वे वह स्थान नहीं पा सके जो उनके हुनर के अनुकूल था।
- जेनिफर विंगेट: टीवी पर सर्वाधिक फीस लेने वाली जेनिफर का फिल्मी डेब्यू ‘फिर से…’ अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। उनके ग्लेमर और टैलेंट को बड़ा पर्दा भुनाने में विफल रहा।
क्यों असफल होते हैं टीवी सितारे?
- सालों तक एक ही किरदार निभाने से दर्शकों के मन में उनकी छवि सीमित हो जाती है।
- टीवी सितारों को अक्सर ऐसी फिल्में ऑफर होती हैं जो मजबूत नहीं होतीं।
- जिन्हें जनता रोज निःशुल्क देखती है, उनके लिए टिकट खरीदना एक चुनौती बन जाता है।
आमना शरीफ, रणविजय सिंह और अनिता हसनंदानी जैसे सितारों का उदाहरण सिद्ध करता है कि एक माध्यम की सफलता दूसरे माध्यम में सफलता की गारंटी नहीं है। हालांकि, ओटीटी (OTT) के आगमन ने इन कलाकारों के लिए एक नया द्वार खोला है, जहाँ अभिनय को स्टारडम से ऊपर रखा जाता है।

