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Food Safety Analysis: फिल्म धुरंध के बाद चर्चा में आया दूध सोडा; स्वाद के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ तो नहीं? जानें एक्सपर्ट की चेतावनी

The loktnatra

द लोकतंत्र : भारतीय सिनेमा सदैव से जनमानस की जीवनशैली को प्रभावित करता रहा है। हाल ही में रिलीज हुई रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, बल्कि इसके एक संवाद ने ‘दूध सोडा’ (Doodh Soda) नामक पेय को अचानक चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस ड्रिंक को बनाने की विधियां वायरल हो रही हैं और दावा किया जा रहा है कि यह पाचन के लिए लाभकारी है। किंतु, चिकित्सा जगत ने इस प्रचलन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का तर्क है कि दूध जैसे प्रोटीन युक्त पदार्थ और कार्बोनेटेड सोडा का मिश्रण एक विषाक्त आहार संयोजन सिद्ध हो सकता है।

क्यों घातक है यह मिश्रण?

दूध एक संपूर्ण आहार है, जबकि सोडा अत्यधिक अम्लीय (Acidic) होता है।

  • फटने का जोखिम: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, जब अम्लीय सोडा को दूध में मिलाया जाता है, तो दूध में मौजूद केसीन प्रोटीन थक्के बनाने लगता है। भले ही ठंडे तापमान के कारण यह बाहर न फटे, किंतु पेट के भीतर पहुंचते ही यह प्रक्रिया तीव्र हो जाती है।
  • पोषक तत्वों का क्षय: सर गंगा राम अस्पताल की सीनियर डायटीशियन फारेहा शानम बताती हैं कि सोडा दूध के कैल्शियम अवशोषण की क्षमता को नष्ट कर देता है, जिससे हड्डियों को दूध का कोई लाभ नहीं मिल पाता।

सेहत पर होने वाले प्रमुख नुकसान

डायटीशियन के अनुसार, दूध सोडा का निरंतर सेवन शरीर के भीतर कई गंभीर विकार पैदा कर सकता है:

  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं: कार्बोनेशन और दूध के मिश्रण से अत्यधिक गैस, ब्लोटिंग और पेट में मरोड़ हो सकती है। लंबे समय तक इसका सेवन पेप्टिक अल्सर के खतरे को बढ़ा देता है।
  • मोटापा और मधुमेह: यदि इसमें 7-अप, कोक या अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है, तो यह कैलोरी का बम बन जाता है। यह इंसुलिन स्पाइक का कारण बनता है, जो डायबिटीज के रोगियों के लिए अत्यंत खतरनाक है।
  • बच्चों के लिए वर्जित: बच्चों का पाचन तंत्र इतना विकसित नहीं होता कि वे इस भारी मिश्रण को पचा सकें, जिससे उन्हें कब्ज की समस्या हो सकती है।

मनोरंजन को स्वास्थ्य से न जोड़ें

  • फारेहा शानम स्पष्ट करती हैं कि कभी-कभार स्वाद के लिए इसे लेना ठीक हो सकता है, किंतु इसे ‘हेल्थ ड्रिंक’ समझना भारी भूल होगी। सिनेमाई प्रवृत्ति अक्सर क्षणभंगुर होती है, किंतु स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभाव स्थायी हो सकते हैं।

निष्कर्षतः, ‘धुरंधर’ की लोकप्रियता अपनी जगह है, किंतु खान-पान के मामले में विशेषज्ञों की सलाह मानना ही श्रेयस्कर है। दूध को हल्दी या केसर के साथ लेना सर्दियों में अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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