द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची (UP Voter List) विशेष गहन परीक्षण (SIR) प्रक्रिया 26 दिसंबर को समाप्त हो गई है और इसके नतीजों ने पूरे राज्य में चर्चा तेज कर दी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने तय हैं।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हटाए गए वोटरों में ज़्यादातर संख्या शहरी क्षेत्रों की है। अकेले लखनऊ में 12 लाख से ज्यादा मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं, जबकि प्रयागराज, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ और कई बड़े शहरों में भी लाखों की संख्या में नाम हटाए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित, अपडेटेड और वास्तविक आधार पर व्यवस्थित करना बताया जा रहा है।
नाम काटे क्यों गए? बड़ी वजहें सामने आईं
चुनाव आयोग के अनुसार 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी, जिसके बाद जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं या सूची में किसी प्रकार की त्रुटि है, वे 30 जनवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही नाम दुबारा जोड़े जाएंगे। अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी की जाएगी। यानी जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे हैं, उनके पास दस्तावेज देकर अपना वोट सुनिश्चित करने का एक ही मौका है।
नाम कटने की सबसे बड़ी वजह शहरी क्षेत्रों में पलायन, पते में बदलाव, मृत मतदाताओं का रिकॉर्ड अपडेट न होना और डुप्लीकेट या लापता वोटर के मामले सामने आना है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सबसे ज्यादा असर शहरों में देखा गया है। लाखों लोग लंबे समय से अपने स्थाई निवास छोड़ चुके हैं या रिकॉर्ड अपडेट नहीं कराया, जिसके चलते उनका नाम स्वतः हट गया। वहीं कई इलाकों में डिजिटलीकरण और मैपिंग के दौरान नो-मैपिंग और ASD (Absent, Shifted, Duplicate) श्रेणी के वोटरों की संख्या काफी ज्यादा निकली।
लाखों वोटर ‘नो मैपिंग’ और ASD में
गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) का आंकड़ा भी ध्यान खींचता है, जहां 18.65 लाख मतदाताओं में से 1.83 लाख लोग नो-मैपिंग श्रेणी में पाए गए हैं और करीब 4.48 लाख मतदाता ASD कैटेगरी में दर्ज हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा और उन्हें पहचान व निवास प्रमाणित करने वाले दस्तावेज जमा करने होंगे। तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं करने पर उनका नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया चुनाव से पहले मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वोट कटने से जनता में चिंता भी बढ़ी है। आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद अपना नाम अवश्य जांचें और अगर नाम गायब हो तो समय रहते दावा और आपत्ति दर्ज कर अपना वोट सुरक्षित करें, क्योंकि यही लोकतांत्रिक अधिकार का मूल आधार है।

