द लोकतंत्र : कैलेंडर के परिवर्तन के साथ ही मानवीय मन में नवीन आशाओं का संचार होता है। किंतु, ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के विद्वानों का मत है कि बाहरी सफलता का सीधा संबंध हमारे निवास स्थान की ऊर्जा से होता है। आज 31 दिसंबर 2025 को वर्ष की विदाई के समय, आने वाले वर्ष 2026 के स्वागत हेतु घर का शुद्धिकरण अनिवार्य है। वास्तु दोष और संचित नकारात्मक ऊर्जा न केवल मानसिक तनाव बढ़ाती है, बल्कि आर्थिक तरक्की में भी अवरोध उत्पन्न करती है। प्राचीन भारतीय मनीषा में वर्णित कुछ बुनियादी बदलावों के माध्यम से हम अपने परिवेश को पवित्र बना सकते हैं।
शुद्धिकरण की प्रक्रिया: नमक और ध्वनि का विज्ञान
वास्तु शास्त्र में नमक को ऋणात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने वाला अद्वितीय तत्व माना गया है।
- लवण मिश्रित मार्जन: नववर्ष की पूर्व संध्या पर सेंधा नमक मिले पानी से घर में पोंछा लगाने से सूक्ष्म नकारात्मक तरंगों का शमन होता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से कीटाणुनाशक भी है।
- ध्वनि तरंगों का प्रभाव: शंख और घंटी की ध्वनि से वातावरण में उच्च आवृत्ति (Frequency) का संचार होता है। गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण घर के तनावपूर्ण माहौल को भंग कर सकारात्मकता स्थापित करता है।
परिमार्जन और प्रवेश: कबाड़ मुक्त घर और मुख्य द्वार
कबाड़ को ज्योतिष में राहु का प्रतीक माना गया है, जो अनावश्यक मानसिक उलझनें पैदा करता है।
- अनावश्यक वस्तुओं का त्याग: टूटा हुआ कांच, बंद घड़ियां और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करते हैं। नए साल की शुरुआत से पूर्व इन्हें घर से हटाना आर्थिक अवरोधों को दूर करने में सहायक होता है।
- मुख्य द्वार की महत्ता: प्रवेश द्वार को ‘सिंह द्वार’ कहा जाता है। इसे तोरण और स्वास्तिक से सजाना देवी लक्ष्मी के आगमन का शुभ संकेत माना जाता है। संध्या के समय द्वार पर दीपक जलाना अंधकार और अज्ञान के विनाश का प्रतीक है।
धार्मिक सुगंध: लोबान और सूर्य प्रकाश
- प्राकृतिक धूप जैसे लोबान और गुग्गल का धुआं घर के वास्तु दोषों को कम करता है। इनकी सुगंध मस्तिष्क के तनाव को कम करके एकाग्रता बढ़ाती है। इसके साथ ही, प्रातःकाल खिड़कियां खोलना ताकि सूर्य की किरणें भीतर प्रवेश करें, घर की नमी और सड़ांध को समाप्त कर जीवंतता का संचार करता है।
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि भौतिक सफाई के साथ-साथ मानसिक शुद्धि भी अनिवार्य है। आने वाले वर्ष 2026 में ‘मिनिमलिस्ट लिविंग’ (न्यूनतम साधन) का ट्रेंड बढ़ेगा, जो वास्तु के अनुरूप है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो परिवार नियमित शुद्धि प्रक्रियाओं का पालन करते हैं, उनके पारस्परिक संबंधों में अधिक मधुरता और स्थायित्व देखा जाता है।
निष्कर्षतः, नववर्ष का स्वागत केवल उत्सवों से नहीं, बल्कि अपने परिवेश के शुद्धिकरण से होना चाहिए। वास्तु के ये सरल उपाय न केवल घर को सुंदर बनाते हैं, अपितु एक ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं जहाँ सफलता और शांति सहज ही प्रवेश कर सकती है। आज शाम ही इन बदलावों की शुरुआत करें।

