द लोकतंत्र : संक्रमण और विभिन्न जल-जनित बीमारियों (Water-borne diseases) से बचाव के लिए भारतीय घरों में पानी उबालकर पीना एक प्राचीन और विश्वसनीय पद्धति रही है। चिकित्सकों द्वारा भी शिशुओं, बुजुर्गों और रोगियों को नियमित उबला हुआ पानी पीने का परामर्श दिया जाता है। किंतु, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने एक चौंकाने वाले तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित किया है—उबला हुआ पानी यदि सही तरीके से संग्रहित (Store) न किया जाए, तो वह शुद्ध होने के बजाय विषैला और हानिकारक हो सकता है। अज्ञानता वश की गई छोटी सी लापरवाही पेट संबंधी गंभीर विकारों को जन्म दे सकती है।
पुनः संक्रमण का खतरा
आरएमएल अस्पताल, नई दिल्ली के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, पानी उबालने की प्रक्रिया में तापमान महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है उबालने के बाद का प्रबंधन।
- वायुमंडलीय दूषण: कई लोग पानी उबालने के बाद उसे ठंडा होने के लिए खुला छोड़ देते हैं। हवा में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु और धूल के कण पानी में पुनः प्रवेश कर सकते हैं। उबला हुआ पानी साधारण पानी की तुलना में तेजी से बाहरी अशुद्धियों को अवशोषित करता है।
- री-बॉयलिंग (Re-boiling): एक ही पानी को बार-बार गर्म करने की प्रवृत्ति खतरनाक हो सकती है। लगातार उबालने से पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और नाइट्रेट्स व फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों की सांद्रता (Concentration) बढ़ने की संभावना रहती है।
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता पर आघात
अशुद्ध तरीके से रखा गया उबला पानी न केवल स्वाद में परिवर्तित होता है, बल्कि वह पाचन तंत्र पर भी विपरीत असर डालता है।
- पाचन संबंधी विकार: पुराने या अस्वच्छ बर्तन में रखे गए उबले पानी का सेवन करने से पेट दर्द, वमन (उल्टी), अतिसार (दस्त) और गैस्ट्रिक समस्याएं हो सकती हैं।
- संवेदनशील समूह: शिशुओं और बुजुर्गों में, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) तुलनात्मक रूप से कम होती है, यह प्रदूषण गंभीर निर्जलीकरण (Dehydration) का कारण बन सकता है।
सुरक्षित संग्रहण के मानक
विशेषज्ञ परामर्श देते हैं कि उबले पानी की शुद्धता बरकरार रखने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं का अनुपालन अनिवार्य है:
- पात्र की स्वच्छता: पानी को हमेशा स्टेनलेस स्टील या कांच के पूरी तरह साफ और ढके हुए बर्तनों में ही रखें। प्लास्टिक के पात्रों में गर्म पानी डालने से रसायनों के घुलने का जोखिम रहता है।
- ताजगी का नियम: उबले हुए पानी को 24 घंटे से अधिक समय तक भंडारित न करें। प्रत्येक दिन नया पानी उबालें और पुराना पानी पौधों या सफाई में इस्तेमाल करें।
- स्पर्श से बचाव: पानी निकालते समय लंबे हत्थे वाले बर्तन या डिस्पेंसर का उपयोग करें ताकि हाथों के कीटाणु पानी के संपर्क में न आएं।
निष्कर्षतः, उबला हुआ पानी स्वास्थ्य के लिए तभी लाभदायक है जब उबालने से लेकर पीने तक की पूरी प्रक्रिया में उच्चतम स्वच्छता बरती जाए। केवल पानी को गर्म कर देना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। जागरूकता और सही आदतें ही हमें और हमारे परिवार को सुरक्षित रख सकती हैं।

