द लोकतंत्र : भारतीय क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी क्षेत्र के दिग्गज, ज़ोमैटो (Zomato) और ब्लिंकिट (Blinkit) ने नववर्ष 2026 की पूर्व संध्या पर 75 लाख ऑर्डर डिलीवर करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल की गई जब गिग वर्कर्स यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। एटरनल के संस्थापक दीपेंद्र गोयल के अनुसार, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और स्थानीय पुलिस के सहयोग से परिचालन पूरी तरह सुचारू रहा। यह डेटा न केवल उपभोक्ता व्यवहार में आए बदलाव को दर्शाता है, अपितु गिग इकॉनमी के लचीलेपन की भी पुष्टि करता है।
ऑपरेशनल सफलता: हड़ताल बनाम कार्यक्षमता
दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा किया कि 4.5 लाख से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स ने बिना किसी अतिरिक्त दबाव के 63 लाख ग्राहकों की सेवा की।
- इंसेंटिव और आय: कंपनी ने स्पष्ट किया कि 31 दिसंबर को डिलीवरी पार्टनर्स को प्रति ऑर्डर ₹120 से ₹150 तक का भुगतान किया गया, जो मानक दरों के अनुरूप था। गोयल के अनुसार, हड़ताल की अपील का असर नगण्य रहा क्योंकि प्रणाली में काम करने वाले अधिकांश लोग स्वैच्छिक रूप से जुड़े हुए हैं।
- लॉ इंफोर्समेंट का सहयोग: कुछ क्षेत्रों में उपद्रवियों द्वारा काम बाधित करने के प्रयास को स्थानीय पुलिस की मदद से विफल कर दिया गया, जिससे वॉर रूम रणनीति सफल रही।
गिग वर्कर्स की मांगें और संघर्ष: यूनियनों का दावा
दूसरी ओर, लेबर यूनियनों ने इस हड़ताल को आंशिक रूप से सफल बताया है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स का दावा है कि लगभग 2.1 लाख श्रमिकों ने विभिन्न शहरों में काम रोका।
- सुरक्षा और 10 मिनट डिलीवरी: यूनियनों का तर्क है कि ’10-मिनट डिलीवरी’ मॉडल राइडर्स की जान जोखिम में डालता है। वे बेहतर दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा लाभों की लगातार मांग कर रहे हैं।
- समान पारिश्रमिक: गिग वर्कर्स का मानना है कि त्योहारों के दौरान कंपनियों का मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन उसका अनुपातिक लाभ अंतिम कड़ी यानी डिलीवरी पार्टनर तक नहीं पहुंचता।
दीपेंद्र गोयल ने गिग इकॉनमी को भारत में संगठित रोजगार सृजन का सबसे बड़ा साधन बताया। उनका दृष्टिकोण है कि यह व्यवस्था समय के साथ और अधिक परिपक्व होगी, जिससे लाखों परिवारों को स्थिर आय और शिक्षा के अवसर मिलेंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 75 लाख ऑर्डर का यह आंकड़ा यह सिद्ध करता है कि भारतीय बाजार अब ‘ऑन-डिमांड’ सेवाओं के लिए पूरी तरह तैयार है।
निष्कर्षतः, 31 दिसंबर का यह रिकॉर्ड डेटा ज़ोमैटो और ब्लिंकिट के लिए एक बड़ी व्यावसायिक जीत है। यद्यपि गिग वर्कर्स की सुरक्षा और वेतन को लेकर बहस जारी रहेगी, किंतु उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे और परिचालन क्षमता ने इस क्षेत्र को एक नई दिशा दी है। कंपनियों के लिए अगली चुनौती तकनीकी सफलता के साथ-साथ मानवीय पक्ष (श्रमिक कल्याण) को संतुलित करने की होगी।

