द लोकतंत्र/ मुम्बई : महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के कई उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना UBT सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इन घटनाओं को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी उम्मीदवारों को या तो केंद्रीय एजेंसियों का डर दिखाया जा रहा है या फिर पैसों के जरिए चुनाव मैदान से हटने के लिए मजबूर किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले पर निर्वाचन आयोग की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस तरह से चुनाव बिना मतदान के ही खत्म किए जा रहे हैं, वह लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है। उनका आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई जैसी एजेंसियों के नाम पर डर का माहौल बनाया जा रहा है या फिर सीधे सौदेबाजी कर विपक्षी प्रत्याशियों को मैदान से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महायुति अपनी जीत “खरीदने” की कोशिश कर रही है, जो बेहद शर्मनाक है।
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मनी पावर’ और एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
प्रियंका चतुर्वेदी के आरोपों का समर्थन करते हुए शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने भी महायुति पर दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ उम्मीदवार इतने भयभीत हैं कि वे अपने घर तक जाने से डर रहे हैं। सावंत ने मुंबई पुलिस आयुक्त से ऐसे उम्मीदवारों को सुरक्षा देने की मांग भी की। उनका कहना है कि सत्ता पक्ष चुनावी मैदान में प्रशासनिक ताकत और भय का इस्तेमाल कर रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
इसी क्रम में शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि जिनके पास केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता है, उनके लिए चुनाव जीतना आसान हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में खुलेआम धनबल का इस्तेमाल हो रहा है और आपराधिक छवि वाले लोगों को टिकट दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, जनता का असली जनादेश उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और शरद पवार के साथ है।
MNS–UBT गठबंधन पर भरोसा, मुंबई के रिकॉर्ड का हवाला
प्रियंका चतुर्वेदी ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना (UBT) के गठबंधन को लेकर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने पिछले 25 वर्षों में मुंबई और महाराष्ट्र में नगर निकायों के माध्यम से विकास का ठोस रिकॉर्ड पेश किया है। उन्होंने मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, बीएमसी की वित्तीय स्थिति और शहर की प्रशासनिक क्षमता का उदाहरण देते हुए कहा कि मुंबईवासियों ने हमेशा ठाकरे ब्रांड पर भरोसा जताया है और आगे भी जताएंगे।
उन्होंने अन्य शहरों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां कथित रूप से ‘सबसे स्वच्छ शहर’ कहा जाने वाला इंदौर भी दूषित पानी से हुई मौतों के कारण सुर्खियों में रहा, वहीं मुंबई ने वित्तीय अनुशासन और शहरी प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन किया है।
महायुति में सीट बंटवारे की कवायद, निर्विरोध जीतों पर सवाल
इस बीच, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बताया कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के एक प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर सीट बंटवारे की मांगों की सूची सौंपी है। उन्होंने नगर निगम चुनावों में 5-6 सीटों और एक एमएलसी पद की मांग रखी है। इससे साफ है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
गौरतलब है कि ठाणे नगर निगम चुनाव में शिंदे गुट की शिवसेना के सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि पुणे और कल्याण-डोंबिवली में भी भाजपा के कई उम्मीदवार बिना मतदान के ही विजयी घोषित हो गए। इन घटनाओं ने विपक्ष के आरोपों को और धार दे दी है।
15 जनवरी को मतदान, 16 जनवरी को नतीजे
महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों जिसमें मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे बड़े शहर शामिल हैं; में 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को मतगणना की जाएगी। चुनाव से पहले निर्विरोध जीतों और विपक्ष के आरोपों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की भूमिका और आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव की दिशा पर टिकी हैं।

