द लोकतंत्र : भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा प्रचलन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक बार फिर भ्रामक सूचनाओं का बाजार गर्म है। वर्ष 2016 की ऐतिहासिक नोटबंदी की यादों के बीच, इन दिनों एक वायरल पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार मार्च 2026 से ₹500 के नोटों का चलन पूर्णतः बंद करने जा रही है। इन दावों ने आम जनमानस में अफरा-तफरी और असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है। हालांकि, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने त्वरित सक्रियता दिखाते हुए इन रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है।
PIB फैक्ट चेक: भ्रामक दावों का पर्दाफाश
पीआईबी की फैक्ट-चेकिंग यूनिट ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है।
- आधिकारिक खंडन: PIB ने स्पष्ट कहा कि रिजर्व बैंक ने ₹500 के नोटों को वापस लेने या सर्कुलेशन बंद करने के संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। सोशल मीडिया पर चल रहा यह दावा पूर्णतः निराधार और गुमराह करने वाला है।
- मुद्रा की वैधता: ₹500 के नोट कानूनी रूप से वैध (Legal Tender) हैं और भविष्य में भी चलन में बने रहेंगे। एटीएम (ATM) के माध्यम से भी इन नोटों की आपूर्ति निरंतर जारी रहेगी।
अतीत के अनुभव और सरकारी आश्वासन
यह प्रथम अवसर नहीं है जब ₹500 के नोटों को लेकर इस प्रकार की भ्रांति फैलाई गई हो।
- संसद में स्पष्टीकरण: अगस्त 2025 में भी इसी तरह की अफवाहें उठी थीं, जिसके बाद वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधऱी ने संसद को लिखित रूप में आश्वस्त किया था कि मुद्रा आपूर्ति को कम करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
- बैंकिंग प्रणाली पर विश्वास: सरकार ने पुनः दुहराया है कि ₹100, ₹200 और ₹500 के नोट बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र का अविभाज्य अंग हैं। किसी भी प्रकार के बड़े निर्णय की सूचना केवल RBI के आधिकारिक चैनलों द्वारा ही दी जाएगी।
निष्कर्षतः, मार्च 2026 में नोटबंदी की खबरें महज एक कोरी कल्पना हैं। भारत सरकार और रिजर्व बैंक वर्तमान मुद्रा ढांचे के साथ अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दशा में कार्य कर रहे हैं। नागरिकों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और ऐसी झूठी खबरों को आगे बढ़ाने से बचें।

