द लोकतंत्र/ पॉलिटिकल डेस्क : कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को हटाकर विकसित भारत– गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-G RAM G कानून लाने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे न केवल असंवैधानिक बताया, बल्कि भावनात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि महात्मा गांधी को पहली बार गोडसे ने मारा था और अब यह सरकार उन्हें दूसरी बार मार रही है। शनिवार को बेंगलुरु में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार में इतनी प्रतिशोध की भावना नहीं होनी चाहिए।
MGNREGA को बताया गरीबों के सम्मान और अधिकार की गारंटी
सिद्धारमैया ने कहा कि MGNREGA की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुई थी और यह संविधान के नीति-निदेशक तत्वों पर आधारित था। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों, छोटे किसानों और मजदूरों को काम का अधिकार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन देना था। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने राज्यों से बिना परामर्श किए इस कानून को हटाकर नया VB-G RAM G कानून लागू कर दिया, जो ‘तानाशाही सोच’ को दर्शाता है।
बिना चर्चा जल्दबाजी में कानून पास कराने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया कानून 17 दिसंबर को संसद में पेश किया गया और अगले ही दिन पारित करा लिया गया। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में न तो पर्याप्त बहस हुई और न ही संघीय व्यवस्था के तहत राज्यों से राय ली गई। उन्होंने दावा किया कि इससे ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों के वैधानिक अधिकार छीन लिए गए हैं और सारी शक्ति केंद्र के हाथ में केंद्रित हो गई है, जो विकेंद्रीकरण की भावना के खिलाफ है।
MGNREGA का सामाजिक प्रभाव और आंकड़े
सिद्धारमैया ने बताया कि देशभर में MGNREGA के तहत करीब 12.17 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं, जिनमें 6.21 करोड़ महिलाएं हैं, यानी कुल श्रमिकों का लगभग 53.61 प्रतिशत। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की भागीदारी क्रमशः लगभग 17 और 11 प्रतिशत है। कर्नाटक में ही 71.18 लाख सक्रिय श्रमिक हैं, जिनमें 36.75 लाख महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया और लोगों को सम्मान के साथ जीने का अवसर दिया।
वेतन हिस्सेदारी में बदलाव पर आपत्ति
मुख्यमंत्री ने केंद्र के प्रस्तावित वेतन बंटवारे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र करता था, लेकिन अब केवल 60 प्रतिशत देने की बात कही जा रही है, जबकि 40 प्रतिशत बोझ राज्यों पर डाला जा रहा है। सिद्धारमैया के मुताबिक यह संविधान के अनुच्छेद 280(3) के खिलाफ है और संघीय ढांचे को कमजोर करता है।
सिद्धारमैया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और BJP पर भी आरोप लगाया कि वे महिलाओं, दलितों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के विरोधी हैं। उन्होंने दावा किया कि MGNREGA को खत्म कर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दिया जा रहा है और ग्रामीण आजीविका को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री को पत्र, कानून वापस लेने की मांग
कर्नाटक मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर VB-G RAM G कानून को रद्द करने और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यों से परामर्श शुरू करने की मांग की है। उन्होंने दोहराया कि MGNREGA को तुरंत बहाल और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण रोजगार, आजीविका और संविधान में निहित अधिकारों की रक्षा हो सके।

