द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने गिग वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट सोशल सिक्योरिटी रूल्स की सराहना करते हुए इसे उनकी मेहनत को ‘पहचान, सुरक्षा और सम्मान’ देने की दिशा में पहला अहम कदम बताया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने हाल ही में नए लेबर कोड्स के तहत कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (सेंट्रल) रूल्स, 2025 का मसौदा जारी किया है, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की रूपरेखा तय की गई है।
राघव चड्ढा बोले- यह छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जीत
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई दी। उन्होंने लिखा कि यह ड्राफ्ट नियम गिग वर्कर्स के लिए एक ‘छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण जीत’ हैं। चड्ढा ने कहा कि भले ही कई प्लेटफॉर्म कंपनियों ने गिग वर्कर्स की आवाज़ को नजरअंदाज किया, लेकिन देश की जनता और सरकार ने उनकी बात सुनी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह बदलाव केवल संसद में मुद्दा उठाने से नहीं, बल्कि गिग वर्कर्स के लगातार संघर्ष और आवाज़ उठाने की वजह से संभव हो पाया है।
संसद से सड़क तक गिग वर्कर्स की आवाज़
राज्यसभा में अपने हस्तक्षेपों के दौरान राघव चड्ढा लंबे समय से गिग वर्कर्स की दुर्दशा को उजागर करते रहे हैं। उन्होंने संसद में बताया था कि कैसे डिलीवरी पार्टनर और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स अत्यधिक दबाव, कम आय और कठिन मौसम परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और ऐप-आधारित सेवाओं के लिए स्पष्ट नियम बनाने, उचित वेतन, सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य स्थितियों की मांग की थी।
नए नियमों में क्या होगा फायदा
नए ड्राफ्ट नियमों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी पहचान दी जाएगी और उन्हें एक यूनिक आइडेंटिटी उपलब्ध कराई जाएगी। कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 में पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की स्पष्ट परिभाषा दी गई है, जो 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुका है।
इस कोड के तहत जीवन और दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा जैसे सामाजिक सुरक्षा उपायों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, एक सोशल सिक्योरिटी फंड और नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन का भी प्रावधान है, जो इन वर्कर्स के कल्याण के लिए योजनाएं तैयार करेगा।
ई-श्रम पोर्टल से मिलेगा अतिरिक्त सहारा
सरकार पहले ही ई-श्रम पोर्टल के जरिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, जिनमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल हैं, का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार कर चुकी है। इस पोर्टल के माध्यम से श्रमिकों को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दिया जाता है और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक ही मंच पर जोड़ा जा रहा है।
कुल मिलाकर, ड्राफ्ट सोशल सिक्योरिटी रूल्स को गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उन्हें न सिर्फ कानूनी पहचान मिलेगी बल्कि भविष्य में सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच भी उपलब्ध हो सकेगा।

