द लोकतंत्र : डिजिटल क्रांति के इस युग में व्हाट्सएप (WhatsApp) अनिवार्य संवाद का माध्यम बन चुका है। भुगतान से लेकर आधिकारिक सत्यापन तक, यह ऐप हमारी दिनचर्या में गहराई से समाहित है। किंतु, यही सुविधा अब साइबर अपराधियों के लिए एक घातक हथियार बन गई है। हाल ही में ‘कॉल फॉरवर्डिंग’ के माध्यम से होने वाले वित्तीय घोटालों में अचानक तेजी आई है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधी मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी चूक का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं के बैंक खातों को चंद मिनटों में शून्य कर रहे हैं।
स्कैम की प्रक्रिया: मनोवैज्ञानिक हेरफेर और कोड का जाल
इस अपराध की मोडस ऑपरेंडी (Modus Operandi) अत्यंत चतुर है। इसकी शुरुआत भरोसा जीतने से होती है।
- छद्म पहचान: ठग स्वयं को बैंक अधिकारी, कूरियर एजेंट या टेलीकॉम प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करता है। वह अक्सर अकाउंट बंद होने या संदिग्ध ट्रांजैक्शन का डर दिखाकर पीड़ित को जल्दबाजी में निर्णय लेने पर मजबूर करता है।
- MMI कोड का खेल: अपराधी पीड़ित को एक विशिष्ट कोड डायल करने को कहता है (जैसे *21*<मोबाइल नंबर>#)। जैसे ही उपयोगकर्ता इसे डायल करता है, उसके नंबर की इनकमिंग कॉल्स बिना किसी अतिरिक्त पुष्टि के ठग के नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती हैं।
सुरक्षा चूक: ओटीपी चोरी और अकाउंट हाईजैक
कॉल फॉरवर्ड होते ही सुरक्षा की पहली दीवार ढह जाती है।
- कॉल-आधारित ओटीपी: बैंक या व्हाट्सएप जब सत्यापन के लिए कॉल करते हैं, तो वह कॉल सीधे अपराधी के पास जाती है। वह आसानी से ओटीपी सुनकर आपके यूपीआई (UPI) पिन बदल सकता है या आपका व्हाट्सएप अकाउंट अपने डिवाइस पर लॉग-इन कर सकता है।
- अदृश्य संकट: पीड़ित को पता ही नहीं चलता कि उसका फोन कॉल रिसीव करना बंद कर चुका है। जब तक उसे नेटवर्क की समस्या का भ्रम टूटता है, तब तक वित्तीय हानि हो चुकी होती है।
विशेषज्ञों की राय: सतर्कता ही सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा
साइबर कानून विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में एआई-आधारित वॉयस क्लोनिंग से यह खतरा और बढ़ सकता है। अतः तकनीकी सावधानी के साथ-साथ जागरूकता अनिवार्य है।
- टू-स्टेप वेरिफिकेशन: व्हाट्सएप में 6 अंकों का पिन जरूर सेट करें। यह अतिरिक्त सुरक्षा परत सिम स्वैपिंग या कॉल फॉरवर्डिंग के दौरान भी अकाउंट बचाए रखती है।
- अज्ञात कोड से परहेज: किसी भी अपरिचित के निर्देश पर अपने फोन से कोई भी शॉर्ट कोड डायल न करें।
निष्कर्षतः, व्हाट्सएप कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम हमारी डिजिटल साक्षरता की परीक्षा ले रहा है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें यह समझना होगा कि कोई भी बैंक या आधिकारिक संस्था कभी भी फोन पर व्यक्तिगत जानकारी या कोड डायल करने का अनुरोध नहीं करती। 2026 की इस तकनीकी दौड़ में सतर्कता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है।

