Advertisement Carousel
National

SC द्वारा दिल्ली दंगों के केस में उमर ख़ालिद-शरजील इमाम को जमानत न दिये जाने पर प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई चिंता

Priyanka Chaturvedi expressed concern over the Supreme Court's refusal to grant bail to Umar Khalid and Sharjeel Imam in the Delhi riots case.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उमर ख़ालिद और शरजील इमाम पिछले पांच वर्षों से जेल में हैं, लेकिन अब तक उनके खिलाफ न तो स्पष्ट आरोप तय हुए हैं और न ही चार्जशीट दाखिल की गई है। इसके बावजूद उन्हें जमानत नहीं दी गई, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रियंका चतुर्वेदी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, इसी मामले में अदालत ने गुलफिशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी है।

UAPA के तहत ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ पर सवाल

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत ऐसा प्रतीत होता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का कोई महत्व नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि जब पांच साल बीत जाने के बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, तब भी जमानत न दिया जाना बेहद चिंताजनक है। प्रियंका ने उम्मीद जताई कि अब इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाए और न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए, ताकि लंबे समय से जेल में बंद आरोपियों को न्याय मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया शामिल थे, ने अपने फैसले में कहा कि उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से ‘गुणात्मक रूप से अलग’ है। अदालत के अनुसार, इन दोनों की कथित भूमिका दिल्ली दंगों की साजिश में ‘केंद्रीय’ मानी गई है। अदालत ने यह भी कहा कि भले ही इनकी हिरासत की अवधि लंबी रही हो, लेकिन यह संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करती और न ही UAPA के तहत लागू कानूनी प्रतिबंधों को दरकिनार किया जा सकता है।

दिल्ली दंगे और कानूनी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को जनवरी 2020 में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था।

सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया इनके भाषणों और गतिविधियों की भूमिका गंभीर प्रतीत होती है। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर UAPA, लंबे समय तक विचाराधीन कैद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।

Team The Loktantra

Team The Loktantra

About Author

लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप यह ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां स्वतंत्र विचारों की प्रधानता होगी। द लोकतंत्र के लिए 'पत्रकारिता' शब्द का मतलब बिलकुल अलग है। हम इसे 'प्रोफेशन' के तौर पर नहीं देखते बल्कि हमारे लिए यह समाज के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही से पूर्ण एक 'आंदोलन' है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Sanjay Singh AAP
National

राज्यसभा सांसद संजय सिंह क्यों हुए निलंबित, क्या है निलंबन के नियम

द लोकतंत्र : आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को सोमवार को उच्च सदन (राज्यसभा) में हंगामा और
HSBC
National

HSBC की रिपोर्ट में महंगाई का संकेत, 5 फीसदी महंगाई दर रहने का अनुमान

द लोकतंत्र : HSBC की रिपोर्ट में महंगाई के संकेत मिले हैं। एचएसबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गेहूं