द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश की विशाख रिफाइनरी (Visakh Refinery) में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की रेज़िड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी (RUF) के कमीशन होने की सराहना की। उन्होंने इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाली अत्याधुनिक सुविधा बताया और कहा कि यह भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई गति देगी।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह अत्याधुनिक सुविधा ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती देती है और भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। उनके इस बयान को देश की ऊर्जा नीति और बुनियादी ढांचे के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर निर्णायक छलांग
इससे पहले केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने भी X पर पोस्ट कर इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में “निर्णायक छलांग” बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu के नेतृत्व में यह परियोजना साकार हो पाई है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विशाख रिफाइनरी में स्थापित यह सुविधा स्वदेशी इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें 2,200 मीट्रिक टन क्षमता वाले तीन LC-Max रिएक्टर लगाए गए हैं, जो दुनिया के सबसे भारी इंजीनियरिंग ब्लॉक्स में गिने जाते हैं। खास बात यह है कि इनका निर्माण और असेंबली पूरी तरह भारत में ही की गई है।
क्षमता बढ़ी, हर बैरल का अधिकतम उपयोग
HPCL की इस नई RUF सुविधा की क्षमता 3.55 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है। इसमें उन्नत रेज़िड्यू हाइड्रोक्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे कच्चे तेल के निचले हिस्से का करीब 93 प्रतिशत तक उच्च मूल्य वाले उत्पादों में रूपांतरण संभव हो सकेगा। इससे हर बैरल कच्चे तेल का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा और देश की तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
करीब 31,407 करोड़ रुपये के निवेश से विशाख रिफाइनरी की कुल प्रोसेसिंग क्षमता 8.33 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर 15 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। इस विस्तार परियोजना ने आंध्र प्रदेश को भारत के प्रमुख ऊर्जा हब के रूप में स्थापित कर दिया है।
पूर्वी भारत की ऊर्जा जरूरतों को मिलेगा बल
इस परियोजना से न केवल आंध्र प्रदेश, बल्कि तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्यों की ऊर्जा आवश्यकताओं को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही यह देश की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा को भी सुदृढ़ बनाएगी।
हाल ही में विशाख रिफाइनरी में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के उत्पादन के लिए एक डेमोंस्ट्रेशन प्लांट का उद्घाटन भी किया गया है। यह प्लांट इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल (UCO) को को-प्रोसेसिंग के जरिए SAF में बदलने की तकनीक पर आधारित है। HPCL की योजना के अनुसार, आवश्यक प्रमाणन के बाद जनवरी 2027 से यहां हर साल 10 हजार मीट्रिक टन SAF का उत्पादन किया जाएगा। यह पहल विमानन क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने और वेस्ट-टू-वेल्थ इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत ने SAF ब्लेंडिंग के लिए 2027 तक 1 प्रतिशत, 2028 तक 2 प्रतिशत और 2030 तक 5 प्रतिशत का लक्ष्य रखा है।
तेल आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश
गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 80 प्रतिशत आयात करता है। सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। फिलहाल भारत करीब 40 देशों से तेल और गैस का आयात कर रहा है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और विविध बनी रहे। HPCL की यह नई सुविधा इन प्रयासों को और मजबूती देगी।

