द लोकतंत्र : देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन के बीच साइबर अपराधी अब लोक-लुभावन सरकारी योजनाओं का मुखौटा ओढ़कर नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक संदेश तीव्रता से प्रसारित हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत सरकार आर्थिक संकट को दूर करने हेतु प्रत्येक नागरिक के बैंक खाते में ₹46,715 जमा करवा रही है। भारत सरकार की आधिकारिक एजेंसी ‘प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो’ (PIB) की फैक्ट चेक इकाई ने इस दावे का गहन परीक्षण करने के पश्चात इसे पूर्णतः भ्रामक और फर्जी घोषित किया है।
फिशिंग का जाल: कैसे काम करता है यह स्कैम?
इस फर्जी संदेश की सबसे खतरनाक कड़ी इसमें दिया गया ‘रजिस्ट्रेशन’ लिंक है। यह तकनीकी रूप से एक ‘फिशिंग’ (Phishing) हमला है।
- फिशिंग की रणनीति: जब यूजर सहायता राशि पाने के लिए संदेश में दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, तो उसे एक ऐसी वेबसाइट पर ले जाया जाता है जो दिखने में आधिकारिक सरकारी पोर्टल जैसी प्रतीत होती है। यहाँ पंजीकरण के नाम पर व्यक्तिगत विवरण, आधार संख्या और बैंक खाते की जानकारी मांगी जाती है।
- डेटा चोरी: एक बार विवरण साझा होते ही, स्कैमर्स उनका उपयोग खाते से अवैध निकासी करने अथवा पहचान चोरी (Identity Theft) के लिए करते हैं।
आधिकारिक स्पष्टीकरण: वित्त मंत्रालय की कोई ऐसी योजना नहीं
- प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय अथवा भारत सरकार के किसी भी विभाग ने ऐसी किसी नकद हस्तांतरण योजना की घोषणा नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मैसेज अक्सर आर्थिक अस्थिरता की अफवाहों का लाभ उठाने के लिए तैयार किए जाते हैं।
सरकारी अपील:
- स्रोतों की पुष्टि: किसी भी योजना की सत्यता जांचने के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइटों (.gov.in) का ही उपयोग करें।
- गोपनीयता सर्वोपरि: ओटीपी (OTP), सीवीवी (CVV) और नेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी कभी भी किसी अज्ञात लिंक या कॉल पर साझा न करें।
- रिपोर्टिंग: ऐसे संदेशों को फॉरवर्ड करने के बजाय तत्काल ‘साइबर सेल’ या PIB को रिपोर्ट करें।
सुरक्षा के नये मानक: Two-Factor Authentication
- भविष्य में ऐसे खतरों से बचने के लिए तकनीकी सुरक्षा अनिवार्य है। सुरक्षा विशेषज्ञ दो-चरणीय प्रमाणीकरण (Two-Factor Authentication) को सक्रिय रखने की सलाह देते हैं। यह सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है जो पासवर्ड चोरी होने की स्थिति में भी अनाधिकृत प्रवेश को रोकती है।
निष्कर्षतः, डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है। ₹46,715 का यह प्रलोभन मात्र एक जाल है। नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी सूचना के पीछे छिपे तथ्यों की जांच करें और त्वरित लाभ के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई को जोखिम में न डालें।

