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Health Spl: सर्दियों में कम पानी पीना पड़ सकता है भारी; किडनी स्टोन और UTI के बढ़ते मामलों पर विशेषज्ञों की चेतावनी

The loktnatra

द लोकतंत्र : जैसे-जैसे उत्तर भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की ओर इशारा किया है। सर्दियों में पसीना कम आने और प्यास का अनुभव न होने के कारण लोग जलापूर्ति (Hydration) की अनदेखी कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, शीतकाल के दौरान किडनी स्टोन (वृक्क अश्मरी) और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) के मामलों में लगभग 25% की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति दीर्घकालिक वृक्क विफलता (Chronic Kidney Disease) का आधार बन सकती है।

पैथोफिजियोलॉजी: अल्प जलापूर्ति और किडनी का दबाव

किडनी का मुख्य कार्य रक्त का शुद्धिकरण और अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालना है।

  • स्टोन निर्माण की प्रक्रिया: लेडी हार्डिंग अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, जब शरीर में जल की कमी होती है, तो मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सलेट और यूरिक एसिड जैसे खनिजों की सांद्रता (Concentration) बढ़ जाती है। यह अवस्था मूत्र को गाढ़ा बनाती है, जिससे ये खनिज क्रिस्टल का रूप लेकर पथरी में परिवर्तित होने लगते हैं।
  • UTI का जोखिम: मूत्र का प्रवाह कम होने से मूत्र मार्ग में बैक्टीरिया को पनपने का पर्याप्त समय मिलता है। पेशाब को रोकने की आदत संक्रमण की प्रक्रिया को और तेज कर देती है, जो विशेषकर महिलाओं में गंभीर हो सकती है।

लक्षण पहचान: शरीर के संकेतों को न करें नजरअंदाज

किडनी स्टोन और संक्रमण के लक्षण प्रारंभ में सामान्य प्रतीत होते हैं, किंतु समय पर उपचार न मिलने पर यह असहनीय पीड़ा का कारण बनते हैं।

  • पेशाब का रंग: यदि मूत्र का रंग गहरा पीला या अत्यधिक बदबूदार है, तो यह गंभीर निर्जलीकरण का संकेत है।
  • शारीरिक पीड़ा: पीठ के निचले हिस्से में तीव्र दर्द, पेशाब के दौरान जलन या रक्त का आना किडनी स्टोन की पुष्टि करता है।
  • संक्रमण के संकेत: कंपकंपी के साथ बुखार और बार-बार पेशाब आने की प्रवृत्ति UTI के लक्षण हैं।

निवारक रणनीति एवं भविष्य का दृष्टिकोण

  • विशेषज्ञों का सुझाव है कि सर्दियों में ‘स्मार्ट हाइड्रेशन’ अपनाना चाहिए। गुनगुना पानी, सूप और हर्बल टी का सेवन शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा बनाए रखता है। डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि उनमें वृक्क क्षति (Kidney Damage) की संभावना दोगुनी होती है। भविष्य में, डिजिटल हेल्थ वियरेबल्स भी उपभोक्ताओं को पानी पीने के समय-समय पर अलर्ट भेजकर इस समस्या से निपटने में मदद कर सकते हैं।

निष्कर्षतः, ठंड के मौसम में प्यास की प्रतीक्षा किए बिना नियमित अंतराल पर जल ग्रहण करना एक अनिवार्य स्वास्थ्य आवश्यकता है। किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग की सुरक्षा के लिए सजगता ही सबसे बड़ी औषधि है। याद रखें, पेशाब का साफ रंग ही स्वस्थ किडनी की पहचान है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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