द लोकतंत्र : हिमाचल प्रदेश का मनाली दशकों से पर्यटकों का पसंदीदा गंतव्य रहा है, किंतु अत्यधिक व्यावसायीकरण और बढ़ती भीड़ ने अब यात्रियों को ‘हिडन जेम्स’ यानी अनछुए स्थलों की खोज करने पर विवश कर दिया है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में ‘स्लो टूरिज्म’ (Slow Tourism) का रुझान बढ़ा है, जहाँ लोग मॉल रोड की चकाचौंध के बजाय हिमाचली गांवों की पारंपरिक जीवनशैली को अनुभव करना चाहते हैं। मनाली के समीप स्थित कुछ ऐसे स्थल हैं, जो प्रकृति के मौन और पहाड़ों की अद्भुत शांति को अपने भीतर समोए हुए हैं।
अनछुए गंतव्य: प्राकृतिक सौंदर्य का अक्षुण्ण भंडार
मनाली के परिधि में स्थित ये स्थल पारिस्थितिकी और शांति का उत्तम मिश्रण प्रस्तुत करते हैं।
- सजला गांव: विरासत और प्रकृति का संगममनाली से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सजला गांव अपनी पारंपरिक काठ-कुनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यहाँ का विष्णु मंदिर और सजला जलप्रपात (Waterfall) पर्यटकों को एक दिव्य अनुभव प्रदान करता है। यह स्थान उन फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग है जो सेब के बागों के बीच हिमाचली संस्कृति को कैद करना चाहते हैं।
- शांघड़: हिमालय का प्राकृतिक गोल्फ कोर्ससैंज घाटी में स्थित शांघड़ अपने विशाल मखमली घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध हो रहा है। मान्यता है कि इन मैदानों को पांडवों ने खेती के लिए तैयार किया था। देवदार के घने जंगलों से घिरी यह जगह एकांत की तलाश करने वालों के लिए आदर्श है।
साहसिक यात्रा एवं ऐतिहासिक महत्व
कुछ स्थल ऐसे हैं जहाँ पहुंचने के लिए थोड़ा शारीरिक परिश्रम अनिवार्य है, किंतु वहाँ का दृश्य थकान मिटा देता है।
- पांडू रोपा: 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहाँ पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान समय बिताया था। यहाँ की शुद्ध हवा और हिमालय का पैनोरमिक व्यू अविस्मरणीय है।
- रानी नाला: रोहतांग की ओर बढ़ते हुए अक्सर लोग इस ठंडी और शांत जगह को अनदेखा कर देते हैं। बर्फ पिघलकर जब नीचे उतरती है, तो रानी नाला का दृश्य किसी पेंटिंग जैसा प्रतीत होता है।
भविष्य का दृष्टिकोण: जिम्मेदार पर्यटन की आवश्यकता
- हिमाचल पर्यटन विभाग के अधिकारी इन ऑफबीट डेस्टिनेशन्स को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी बल दे रहे हैं। भविष्य में, इन क्षेत्रों में होमस्टे (Homestay) संस्कृति को मजबूत किया जाएगा ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिले और पारिस्थितिक संतुलन भी बना रहे। पर्यटकों को परामर्श दिया जाता है कि वे इन संवेदनशील क्षेत्रों में प्लास्टिक का प्रयोग न करें और स्थानीय मर्यादाओं का सम्मान करें।
निष्कर्षतः, मनाली का वास्तविक जादू उसकी भीड़भाड़ वाली सड़कों में नहीं, बल्कि इन शांत कोनों में छिपा है। सजला, शांघड़ और पांडू रोपा जैसे स्थल न केवल मनोरंजन प्रदान करते हैं, बल्कि आत्मा को प्रकृति के साथ पुनः जोड़ने का अवसर भी देते हैं। 2026 की आपकी पहाड़ी यात्रा इन अनछुए रास्तों के बिना अधूरी है।

