द लोकतंत्र : सूचना क्रांति के इस दौर में ‘स्वस्थ जीवनशैली’ का अर्थ सोशल मीडिया रील्स और वायरल डाइट चार्ट तक सीमित हो गया है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है: जिसे दुनिया ‘सुपरफूड’ कह रही है, वह आपके शरीर के लिए विष समान भी हो सकता है। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियों जैसे कैटरीना कैफ और दीपिका पादुकोण की डाइट एक्सपर्ट रहीं प्रसिद्ध सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के अनुसार, पोषण का कोई ‘वन साइज फिट्स ऑल’ (एक ही नियम सबके लिए) फॉर्मूला नहीं होता। उन्होंने बताया कि कैसे वर्तमान में प्रचलित कई ‘हेल्दी’ आदतें वास्तव में पाचन तंत्र और हार्मोनल संतुलन को नष्ट कर रही हैं।
भ्रामक स्वस्थ आदतें: वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
श्वेता शाह के अनुसार, किसी खाद्य पदार्थ की लोकप्रियता उसके औषधीय गुणों की गारंटी नहीं है। उन्होंने चार प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया है जहाँ लोग अक्सर चूक करते हैं।
- ठंडी स्मूदी का प्रभाव: फल, दही और नट्स का मिश्रण (स्मूदी) पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। किंतु, इसे बर्फ की तरह ठंडा पीना ‘अग्नि’ (पाचन अग्नि) को मंद कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार, अत्यधिक ठंडी वस्तुएं चयापचय (Metabolism) को धीमा करती हैं, जिससे ऊर्जा मिलने के बजाय शरीर में सुस्ती और हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है।
- मल्टीग्रेन आटे की जटिलता: अनेकों अनाजों को मिलाकर बनाई गई रोटियां वर्तमान में अत्यंत लोकप्रिय हैं। वैज्ञानिक रूप से, हर अनाज के पचने का समय और प्रकृति भिन्न होती है। श्वेता शाह के अनुसार, विभिन्न अनाजों का मिश्रण कुछ लोगों में गंभीर ब्लोटिंग (पेट फूलना) और भारीपन का कारण बनता है, क्योंकि शरीर एक साथ कई जटिल प्रोटीनों को पचाने में असमर्थ होता है।
समय और चयन का महत्व: सलाद और फैट का विज्ञान
पोषण केवल इस बारे में नहीं है कि आप क्या खाते हैं, बल्कि इस बारे में भी है कि आप कब खाते हैं।
- रात्रि में कच्चा सलाद: वजन घटाने की होड़ में लोग रात के भोजन में कच्चे सलाद का सेवन करते हैं। कच्ची सब्जियां पचाने में कठिन होती हैं। रात्रि के समय जब शरीर की पाचन शक्ति स्वाभाविक रूप से कम होती है, तब कच्चा सलाद ‘गट हेल्थ’ (आंतों के स्वास्थ्य) को बिगाड़ सकता है, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- देसी घी का बहिष्कार: वसा (Fats) के प्रति बढ़ते भय के कारण लोग देसी घी का त्याग कर रहे हैं। श्वेता शाह का तर्क है कि आंतों के सुचारू संचालन और मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए ‘गुड फैट्स’ अनिवार्य हैं। घी को पूरी तरह स्किप करना जोड़ों के दर्द और रूखी त्वचा का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञ राय और भविष्य का परिदृश्य
- श्वेता शाह, जिन्होंने महेंद्र सिंह धोनी और ऋषभ पंत जैसे एथलीटों के साथ कार्य किया है, ‘व्यक्तिगत पोषण’ (Personalized Nutrition) पर बल देती हैं। उनका मानना है कि 2026 तक वैश्विक स्वास्थ्य रुझान पुनः प्राचीन आयुर्वेद और स्थानीय खान-पान की ओर लौटेंगे। भविष्य में, कृत्रिम आहार सप्लीमेंट्स के स्थान पर ‘प्रकृति-आधारित’ और ‘संयमित’ भोजन ही दीर्घायु का आधार होगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी नए डाइट ट्रेंड को अपनाने से पहले अपनी शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) का विश्लेषण अवश्य करवाएं।
निष्कर्षतः, स्वस्थ रहने के लिए किसी भीड़ का हिस्सा बनना जोखिम भरा हो सकता है। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के विचार यह स्पष्ट करते हैं कि संतुलन और पारंपरिक ज्ञान ही वास्तविक स्वास्थ्य की कुंजी है। सोशल मीडिया के ‘फिल्टर्ड’ ज्ञान के बजाय अपने शरीर की प्रतिक्रिया को सुनना और विशेषज्ञ की सलाह लेना ही 2026 की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आवश्यकता है। याद रखें, भोजन केवल ईंधन नहीं, बल्कि वह सूचना है जो आपके जीन और हार्मोन को निर्देशित करती है।

