द लोकतंत्र : भारतीय सनातन परंपरा के अनुसार, आगामी 14 जनवरी का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत असाधारण होने वाला है। इस वर्ष मकर संक्रांति का पावन पर्व षटतिला एकादशी के दुर्लभ संयोग के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी तिथि का एक ही दिन पड़ना लगभग 23 वर्षों के अंतराल के बाद हो रहा है। यह महासंयोग पितरों की मुक्ति, शारीरिक शुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन सूर्य देव की तेजस्विता और श्रीहरि विष्णु की सौम्यता का संगम भक्तों को दोहरे पुण्य फल की प्राप्ति कराएगा।
पंचांग गणना: पुण्य काल और शुभ मुहूर्त का विश्लेषण
पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव उत्तरायण की यात्रा प्रारंभ करते हुए मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
- संक्रांति मुहूर्त: पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से सायं 05:45 बजे तक रहेगा, जो दान-स्नान के लिए श्रेष्ठ है। विशेष रूप से महा पुण्य काल का समय दोपहर 03:13 से 04:58 तक होगा, जिसमें की गई साधना अक्षय फल प्रदान करती है।
- एकादशी का संयोग: माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी तिथि 13 जनवरी की दोपहर से प्रारंभ होकर 14 जनवरी की सायं 05:52 बजे तक व्याप्त रहेगी। उदयातिथि के सिद्धांत के अनुसार, 14 जनवरी को ही एकादशी का उपवास रखा जाना शास्त्रसम्मत है।
द्वैत पूजा विधान: सूर्य और विष्णु की आराधना
इस महासंयोग के अवसर पर पूजा विधि में समन्वय आवश्यक है, क्योंकि एक ओर ‘कर्म’ के देवता सूर्य हैं और दूसरी ओर ‘पालनहार’ विष्णु।
- सूर्य उपासना: ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, प्रयागराज) में स्नान का विशेष महत्व है। तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य देते समय ‘ॐ सूर्याय नम:’ मंत्रों का उच्चारण सौर ऊर्जा को आत्मसात करने में सहायक होता है।
- षटतिला एकादशी अनुष्ठान: इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग (स्नान, उबटन, तर्पण, दान, भोजन और आहुति) अनिवार्य बताया गया है। भगवान विष्णु को तिलकुट और पंचामृत का भोग लगाकर तुलसी दल अर्पित करना पितृ दोषों से मुक्ति दिलाता है।
ज्योतिषीय महत्व और भविष्य का प्रभाव
- ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि मकर संक्रांति पर एकादशी का होना शनि और सूर्य के संबंधों में मधुरता लाने वाला होता है, क्योंकि सूर्य अपने पुत्र शनि के घर में प्रवेश करते हैं। 2026 का यह संयोग वैश्विक शांति और सामाजिक समरसता के लिए अनुकूल संकेत दे रहा है। आने वाले समय में यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान, बल्कि जल संरक्षण और दान की संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा। आयुर्वेद के अनुसार, इस दिन तिल और गुड़ का सेवन शीत ऋतु में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाने का एक वैज्ञानिक आधार भी प्रस्तुत करता है।
निष्कर्षतः, 14 जनवरी 2026 की मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का यह महासंयोग संयम, साधना और सेवा का एक बड़ा अवसर है। सूर्य की उत्तरायण गति हमारे जीवन में नई ऊर्जा और प्रकाश का संचार करेगी, जबकि एकादशी का व्रत अंतर्मन की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस दुर्लभ अवसर पर विधि-विधान से की गई पूजा निश्चित रूप से सौभाग्य और सुख-शांति का कारक बनेगी।

