द लोकतंत्र : उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में शीत लहर का प्रकोप निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में गृहस्थियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने निवास स्थान को गर्म और आरामदायक बनाए रखने की होती है। आमतौर पर बिजली से चलने वाले हीटर और ब्लोअर को प्राथमिक समाधान माना जाता है, किंतु विशेषज्ञों ने इनके अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों और ऊंचे बिजली बिलों के प्रति सचेत किया है। वास्तुशिल्पियों और जीवनशैली विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ऊष्मारोधन’ (Insulation) के पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर बिना किसी मशीनी उपकरण के घर के तापमान को 3 से 5 डिग्री तक बढ़ाया जा सकता है। यह न केवल आर्थिक रूप से किफायती है, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी एक संवेदनशीन दृष्टिकोण है।
ऊष्मारोधन का विज्ञान: दरारें और फर्श का प्रबंधन
घर के भीतर ठंड का मुख्य स्रोत खुली खिड़कियां और दरारें होती हैं, जहाँ से ‘कन्वेक्शन’ (Convection) प्रक्रिया के तहत ठंडी हवा प्रवेश करती है।
- वायु अवरोधक (Draft Excluders): अध्ययनों के अनुसार, लगभग 15 से 25 प्रतिशत गर्मी दरवाजों और खिड़कियों की महीन दरारों से बाहर निकल जाती है। दरवाजों के निचले हिस्से में पुराना तौलिया या ‘ड्राफ्ट स्नेक’ रखकर इस रिसाव को रोका जा सकता है। शाम होते ही खिड़कियों पर मोटे पर्दे डालना एक प्रभावी ‘थर्मल बैरियर’ का कार्य करता है।
- सतह का तापमान: पत्थर या टाइल का फर्श ऊष्मा का सुचालक होता है और तेजी से ठंडा होता है। फर्श पर ऊनी कालीन या जूट के गलीचे बिछाने से ‘कंडक्शन’ (Conduction) की प्रक्रिया रुकती है, जिससे पैरों के माध्यम से शरीर में पहुँचने वाली ठंड कम होती है।
आंतरिक विन्यास और रसोई की भूमिका
घर का फर्नीचर और दीवारों की सजावट केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि तापमान नियंत्रण में भी सहायक सिद्ध होती है।
- दीवारों का ऊष्मीय उपचार: खाली दीवारें विकिरण (Radiation) के माध्यम से ठंड सोखती हैं। दीवारों पर टेपेस्ट्री या वॉल हैंगिंग लगाने से वे अतिरिक्त परत का काम करती हैं। सोफे और कुर्सियों को सीधे ठंडी दीवारों से सटाकर रखने के बजाय थोड़ा दूर रखना चाहिए।
- रसोई की अवशिष्ट ऊष्मा (Residual Heat): भोजन पकाते समय उत्पन्न होने वाली ऊष्मा का उपयोग घर को प्राकृतिक रूप से गर्म करने के लिए किया जा सकता है। खाना पकाने के उपरांत रसोई का द्वार खुला रखने से हवा में नमी और गर्मी फैलती है, जो शाम के समय पूरे घर के वातावरण को सुखद बना देती है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की दिशा
- पर्यावरण विशेषज्ञों और आर्किटेक्ट्स का मानना है कि 2026 में ‘पैसिव हीटिंग’ (Passive Heating) की अवधारणा को अधिक महत्व दिया जा रहा है। इंटीरियर डिजाइनर सुश्री वंदना खन्ना के अनुसार, “सर्दियों में भारी मखमल या ऊनी कपड़ों के कुशन और थ्रो का उपयोग न केवल कमरे को ‘कोजी’ बनाता है, बल्कि मानवीय शरीर की गर्मी को संचित करने में भी मदद करता है।” आने वाले समय में, सतत वास्तुकला (Sustainable Architecture) के तहत घरों का निर्माण इस प्रकार किया जाएगा कि वे प्राकृतिक रूप से मौसम के अनुकूल रह सकें। तब तक, ये छोटे-छोटे परिवर्तन हमारे जीवन को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सुखद बना सकते हैं।
निष्कर्षतः, घर को गर्म रखने के लिए सदैव तकनीक और बिजली पर निर्भर रहना अनिवार्य नहीं है। पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान के समन्वय से हम एक ऐसा वातावरण निर्मित कर सकते हैं जो स्वास्थ्यप्रद और पर्यावरण के अनुकूल हो। मोटे पर्दे, कालीनों का उपयोग और छोटी दरारों को बंद करने जैसी सामान्य आदतें न केवल कड़ाके की ठंड से सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि हमारे रहने के स्थान को अधिक मानवीय और आरामदायक भी बनाती हैं।

